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जी राम जी से पहले ‘स्पर्श’ से दूर होगी अनियमितता।
संवाद सूत्र, बाराबंकी। विकसित भारत ‘जी राम जी’ लागू किए जाने से पहले सरकार केंद्र प्रायोजित योजनाओं की भुगतान प्रणाली को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाने की दिशा में बेहतर कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने मनरेगा में सामग्री एवं प्रशासनिक मद का भुगतान एसएनए-स्पर्श प्रणाली से किया जाएगा, जिससे भुगतान प्रक्रिया से अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण हो सकेगा।
केंद्र सरकार की ओर लागू की गई एसएनए-स्पर्श प्रणाली सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस), राज्य की एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (आइएफएमएस) तथा भारतीय रिजर्व बैंक की ई-कुबेर प्रणाली पर आधारित एकीकृत भुगतान करने का ढांचा बनाया गया है।
इस नई व्यवस्था को लागू करने से पूर्व ग्रामीण विकास मंत्रालय ने एसएनए-स्पर्श पोर्टल तैयार किया है। अब भविष्य में जी राम जी के अंतर्गत सामग्री एवं प्रशासनिक मद के सभी भुगतान इसी प्रणाली के माध्यम से किए जाएंगे।
उपायुक्त ब्रजेश त्रिपाठी ने बताया कि नवीन व्यवस्था के अनुसार जिले एवं विकास खंड स्तर पर समुचित परीक्षण के उपरांत सभी बिलों की प्रविष्टि वेबसाइट पर की जाएगी।
राज्य स्तर से सामग्री एवं प्रशासनिक मद में धनराशि आवंटित होने के बाद आवंटित सीमा के अनुरूप निधि अंतरण आदेश (एफटीओ) का सृजन किया जाएगा। एफटीओ सृजन के पश्चात प्रथम एवं द्वितीय हस्ताक्षरकर्ता द्वारा उस पर डिजिटल हस्ताक्षर किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि एफटीओ पर हस्ताक्षर होने के उपरांत एसएनए-स्पर्श पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ा अनुमोदक प्रवेश के माध्यम से बिलों का अनुमोदन किया जाएगा। आहरण एवं वितरण अधिकारी द्वारा डिजिटल बिल तैयार कर उन्हें वित्त विभाग से संचालित साइबर कोषागार में भुगतान के लिए प्रस्तुत करेंगे।
कोषागार में बिल प्रस्तुत होने के उपरांत भारतीय रिजर्व बैंक में सामग्री एवं प्रशासनिक मद के लिए संचालित संबंधित बैंक खाते के माध्यम से भुगतान किया जाएगा।
एसएनए-स्पर्श पोर्टल पर प्रशासनिक उपयोगकर्ताओं का पंजीकरण राज्य स्तर से किया गया है। जिले स्तर पर उपायुक्त (श्रम एवं रोजगार), विकास खंड स्तर पर कार्यक्रम अधिकारी तथा कन्वर्जेंस के अंतर्गत संबंधित विभागों के अधिकृत अधिकारियों को प्रशासक नामित किया गया है। भुगतनान और परीक्षण की जिम्मेदारी उपायुक्त की होगी। |
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