Indian Currency Security Thread: क्या आपने कभी गौर किया है कि हमारे ₹100, ₹500 या ₹2000 (अब बंद) के नोटों के बीच में एक चमकता हुआ धागा या तार दिखाई देता है? बहुत लोग मानते हैं कि यह चांदी का तार (Silver Thread) होता है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है. असल में यह तार सुरक्षा धागा (Security Thread) कहलाता है, जो भारतीय करेंसी की फेक या नकली नोट पहचानने की सबसे अहम विशेषताओं में से एक है.
रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के मुताबिक, करेंसी नोट के बीच में लगा यह तार असली चांदी का नहीं होता, बल्कि यह धातुयुक्त (metallic) और माइक्रो-प्रिंटेड सुरक्षा धागा होता है. इस धागे को विशेष तकनीक से कागज के बीच में बुना (embedded) जाता है, ताकि नकली नोट बनाना लगभग असंभव हो.
यह धागा आमतौर पर पॉलिएस्टर, नायलॉन या प्लास्टिक के मेटलाइज्ड मिश्रण से बना होता है. इसमें सूक्ष्म अक्षरों (micro letters) में “भारत” या “RBI” लिखा होता है, जो लाइट या अल्ट्रावायलेट (UV) लाइट में साफ दिखाई देता है. कुछ नोटों में यह धागा पूरी तरह दिखाई देता है (windowed security thread), जबकि कुछ में यह आंशिक रूप से अंदर होता है. जब नोट को रोशनी के सामने रखा जाता है, तो यह धागा लगातार एक सीधी लाइन में चमकता है — यही उसका सुरक्षा संकेत है.
₹100 नोट: इसमें नीले रंग का सिक्योरिटी थ्रेड होता है, जिस पर “भारत” और “RBI” लिखा रहता है.₹200 नोट: यह थ्रेड हरे और नारंगी के बीच चमकता है.₹500 नोट: इसमें हरे रंग का सुरक्षा धागा होता है, जो झुकाने पर नीले-हरे में बदलता दिखाई देता है.₹2000 (अब बंद): इसमें मैजेंटा रंग का धागा होता था, जो झुकाने पर हरे और नीले के बीच रंग बदलता था.
यह सिक्योरिटी थ्रेड भारत की करेंसी को फर्ज़ी नोटों से बचाने की पहली परत है. क्योंकि यह बहुत विशेष तकनीक से बनाया जाता है. इसे “Intaglio Printing” और “Micro-Printing” तकनीक से तैयार किया जाता है, जो केवल RBI द्वारा स्वीकृत मुद्रणालयों में ही संभव है. नकली नोट बनाने वाले इसे अक्सर साधारण चमकीली लाइन या सिल्वर पेंट से कॉपी करने की कोशिश करते हैं, लेकिन असली थ्रेड की रोशनी में बदलती चमक और अक्षरों की महीन लिखावट को कॉपी करना लगभग असंभव है.
वॉटरमार्क: महात्मा गांधी की तस्वीर और RBI लोगो रोशनी में उभरकर दिखाई देते हैं.कलर-शिफ्टिंग इंक: कुछ अंकों और प्रिंट्स का रंग झुकाने पर बदल जाता है.माइक्रो लेटरिंग: "RBI" और मूल्य अंक छोटे अक्षरों में छपे होते हैं.लैटेंट इमेज: नोट को झुकाने पर मूल्य संख्या उभरकर आती है.इंटैग्लियो प्रिंटिंग: उभरे हुए टेक्स्ट और डिजाइन, जिन्हें छूने पर महसूस किया जा सकता है.
अगर आप किसी नोट की असलियत जांचना चाहते हैं, तो उसे रोशनी के सामने रखें, सिक्योरिटी थ्रेड एक सीधी लाइन में चमकना चाहिए. “भारत” और “RBI” के शब्द धागे में दिखाई देने चाहिए. नोट को झुकाएं- रंग बदलने वाला प्रभाव दिखेगा और ध्यान दें नोट का धागा अंदर-बाहर दोनों जगह दिखाई देता है.
नहीं, करेंसी नोट में असली चांदी का इस्तेमाल नहीं किया जाता. हालांकि यह धागा मेटलिक दिखता है और इसकी चमक चांदी जैसी होती है, लेकिन यह सिंथेटिक मटीरियल और एल्यूमिनियम बेस्ड मेटल फॉइल से बनाया जाता है. यह ज्यादा टिकाऊ, हल्का और सुरक्षा के लिहाज से चांदी से कहीं बेहतर होता है.
FAQs
1. क्या करेंसी नोटों में असली चांदी का तार होता है?
नहीं, यह असली चांदी का नहीं बल्कि एक मेटलिक सिक्योरिटी थ्रेड होता है.
2. सिक्योरिटी थ्रेड क्यों लगाया जाता है?
यह नकली नोटों को पहचानने में मदद करता है और करेंसी की सुरक्षा सुनिश्चित करता है.
3. इस धागे में क्या लिखा होता है?

इस पर “भारत” और “RBI” जैसे शब्द माइक्रो अक्षरों में छपे होते हैं.
4. क्या हर नोट में थ्रेड एक जैसा होता है?
नहीं, हर मूल्य वर्ग के नोट में इसका रंग और पैटर्न अलग होता है.
5. असली नोट पहचानने का आसान तरीका क्या है?
नोट को रोशनी में देखें, सुरक्षा धागा चमकना चाहिए और उस पर RBI व भारत लिखा होना चाहिए.
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