पंजाब में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए खरीदे जाने हैं स्मार्टफोन।
दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पंजाब में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन के लिए अभी इंतजार करना पड़ सकता है। 58.30 करोड़ के टेंडर पर विवाद के चलते पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने खरीद प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है।
महिला एवं बाल विकास विभाग की पोषण योजना के तहत 28515 स्मार्टफोन खरीदे जाने हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि रद किए टेंडर को दोबारा बहाल कर उसी कंपनी को अनुबंध दिया गया है। यह नियमों के विपरीत है, इसलिए पूरी प्रक्रिया रद की जानी चाहिए।
अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई में मामले की गंभीरता देखते हुए फिलहाल टेंडर के क्रियान्वयन पर रोक लगाने का आदेश पारित किया। साथ ही, पंजाब सरकार, पंजाब इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीआईसीटीसी) और सामाजिक सुरक्षा एवं महिला एवं बाल विकास विभाग को नोटिस जारी कर 23 फरवरी तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
रिकॉर्ड के अनुसार पंजाब इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी कॉरपोरेशन ने पिछले वर्ष 27 जून को स्मार्टफोन खरीद के लिए टेंडर जारी किया था। 13 अक्टूबर को सबसे कम दर देने के आधार पर यह ठेका मेसर्स एसआईएसएल इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित कर दिया गया।
सैमसंग ए-16 फाइव-जी खरीदे जाने हैं
टेंडर की शर्तों के अनुसार कंपनी को सैमसंग गैलेक्सी ए-16 फाइव-जी मॉडल के फोन उपलब्ध कराने थे। कंपनी ने विभाग को सूचित किया कि निर्धारित मॉडल बाजार में उपलब्ध नहीं है। उसने उसी कीमत पर अधिक उन्नत स्पेसिफिकेशन वाले सैमसंग ए-16 फाइव-जी मोबाइल फोन देने का प्रस्ताव रखा।
विवाद की वजह यह है
विभाग ने 31 अक्टूबर को इस प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए 7 नवंबर को ठेका रद कर दिया और उसी दिन नई टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी। याचिका के अनुसार बाद में 5 जनवरी को बिना किसी पूर्व सूचना के दूसरी टेंडर प्रक्रिया को रद कर दिया गया और पहले रद किए गए टेंडर को बहाल करते हुए दोबारा उसी कंपनी को अनुबंध जारी कर दिया गया।
अन्य बोलीदाता पहुंचे हाईकोर्ट
इस निर्णय को अन्य बोलीदाता कंपनी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी और कहा कि यह न केवल टेंडर शर्तों का उल्लंघन है बल्कि प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है।
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों से जवाब तलब करते हुए स्पष्ट किया कि मामले में अगली सुनवाई तक टेंडर पर यथास्थिति बनाए रखी जाएगी। अदालत के इस अंतरिम आदेश के बाद राज्य सरकार और संबंधित विभागों की ओर से विस्तृत जवाब दाखिल किए जाने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। |
|