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46 लाख आवेदन फंसे, 40 लाख में सिर्फ सुधार की जरूरत; भूमि विवाद पर सरकार सतर्क

Chikheang 1 hour(s) ago views 579
  

प्राथम‍िकता के आधार पर सरकार नि‍पटा रही जमीन के मामले। सांकेत‍िक तस्‍वीर  



राज्य ब्यूरो, पटना। उप मुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने गुरुवार को विधानसभा में यह जानकारी दी कि उनके विभाग के पास लंबित 46 लाख आवेदन में अकेले 40 लाख आवेदन परिमार्जन से संबंधित हैं।

इनमें बड़ी संख्या में त्रुटि नाम और पिता के नाम की है। विधानसभा मे प्रश्नकाल के दौरान असर्वेक्षित भूमि से संबंधित आए प्रश्न के उत्तर में उन्होंने यह जानकारी दी।
उप मुख्यमंत्री ने कहा-कहीं नाम तो कहीं पिता का नाम गलत

इस प्रश्न काे बरौली विधायक मंजीत कुमार सिंह ने उठाया था। उन्होंने कहा कि बिहार में असर्वेक्षित जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक सितंबर 2024 में पटना उच्च न्यायालय ने हटा लिया।

प्रदेश के अररिया, अरवल, बांका, बेगूसराय, जमुई, जहानाबाद, कटिहार, खगड़िया, किशनगंज. लखीसराय, मधेपुरा, मुंगेर, नालंदा, पश्चिम चंपारण, पूर्णिया. सहरसा, शेखपुरा, शिवहर, सीतामढ़ी, सुपौल, सारण, सिवान व गोपालगंज में असर्वेक्षित जमीन की खरीद-बिक्री होने पर भी दाखिल खारिज नहीं हो रहा है।  

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि असर्वेक्षित भूमि का खाता-खेसरा नहीं होने के कारण दाखिल-खारिज में परेशानी है। असर्वेक्षित भूमि के सर्वे के लिए 29 अक्टूबर 2024 को ही सभी बंदोबस्त पदाधिकारियों को निर्देश जारी किया गया है। महाधिवक्ता से भी परामर्श किया गया है। सरकार जमीन विवाद से मुक्ति के लिए पूरी तरह से संवेदनशील है ।
राजस्‍व महा अभ‍ियान में आए 46 लाख आवेदन

बता दें कि एक दिन पहले भी डिप्‍टी सीएम ने इस मामले में विधानपरिषद में बातें रखीं थीं। उन्‍होंने नीरज कुमार के अल्पसूचित प्रश्न के उत्तर में बताया कि राजस्व महा-अभियान के दौरान कुल 46 लाख आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से लगभग 40 लाख आवेदन केवल परिमार्जन के हैं।  

पहली प्राथमिकता इनके निष्पादन की है, ताकि जमीन मालिकों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। जनकल्याण संवाद के माध्यम से इन परिमार्जन मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए समय-सीमा निर्धारित की जाती है।

पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु अंचलवार रजिस्ट्रेशन काउंटर खोले जाते हैं, जहां संबंधित अंचल के साथ-साथ अन्य अंचलों के पदाधिकारी भी शामिल रहते हैं।

उन्होंने कहा कि हम इस कार्यक्रम के माध्यम से जमीन की बीमारी की पहचान कर रहे हैं। जमीन की समस्या जटिल है, और जमीन जमीर को भी प्रभावित करती है। बिहार में जमीन विवाद के कारण बहुत लहू बहा है, इसे रोकना है और विकास की धारा को आगे बढ़ाना है।
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