प्रतीकात्मक तस्वीर
जागरण संवाददाता, सहारनपुर। आयकर जांच और ईडी का भय दिखाकर कपड़ा व्यापारी से 90.95 लाख रुपये की ठगी की गई है। पीड़ित संजय गांधी ने अपनी शिकायत में बताया कि जुलाई 2025 में उनके फोन पर विक्रम नामक व्यक्ति का कॉल आया। आरोपित ने संजय को बताया कि वह एटोरो फाइनेंशियल कंपनी लिमिटेड में कार्यरत है।
इसके बाद ठगों ने उन्हें जीजीएफपी एप के माध्यम से कंपनी में निवेश करने का लालच दिया, जिसमें अधिक मुनाफे का वादा किया गया।
संजय ने बताया कि 19 जुलाई 2025 को उन्होंने साइबर ठगों के कहने पर 10 हजार रुपये एक खाते में ट्रांसफर किए। इसके बदले में उन्हें 11,866 रुपये मुनाफे के रूप में मिले। इसके बाद ठगों ने संजय से कई बार रकम ट्रांसफर कराई। जब संजय ने अपनी राशि निकालने का प्रयास किया तो आरोपितों ने केवाईसी और अन्य प्रक्रियाओं का हवाला देकर उन्हें फिर से पैसे जमा करने के लिए मजबूर किया।
इसके बाद उन्हें ईडी और आयकर विभाग की जांच का डर दिखाकर धमकाया गया और चुप रहने की सलाह दी गई। आरोपितों ने जुलाई से दिसंबर 2025 के बीच संजय से विभिन्न खातों में 90.95 लाख रुपये ट्रांसफर कराए। पुलिस ने शिकायत के आधार पर विक्रम और कुलदीप कौर निवासी सूरत के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
डिजिटल युग में सतर्क रहने की आवश्यकता
साइबर थाना प्रभारी इंद्रेश चौहान ने बताया कि साइबर अपराधी नई-नई तकनीकों का उपयोग कर लोगों को ठग रहे हैं। डिजिटल पेमेंट और इंटरनेट बैंकिंग के बढ़ते उपयोग को देखते हुए वित्तीय सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि आजकल सरकारी कार्य, बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और संचार का एक बड़ा हिस्सा इंटरनेट पर निर्भर है। ऐसे में छोटी-सी गलती भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। इसलिए लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है।
यदि कोई साइबर ठगी का शिकार होता है, तो उसे तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करनी चाहिए या वेबसाइट पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। समय पर शिकायत करने से नुकसान को कम किया जा सकता है।
सावधानी बरतने के उपाय
1. अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
2. संदिग्ध ईमेल और मैसेज से सावधान रहें।
3. बिना जांचे कोई एप डाउनलोड न करें।
4. अपनी निजी जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
5. केवल बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या एप का उपयोग करें।
6. पब्लिक वाई-फाई पर लेनदेन न करें।
7. पासवर्ड और पिन को नियमित रूप से बदलें।
8. ओटीपी और सीवीवी नंबर किसी से साझा न करें।
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