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59 वर्षों तक कानूनी लड़ाई के बाद जमीन पर मिला कब्जा
राज्य ब्यूरो, रांची। रांची सिविल कोर्ट में जमीन विवाद से जुड़े एक मामले में 59 वर्षों तक चली सुनवाई के बाद जमीन मालिक को न्याय मिला है। गुरुवार को कोर्ट के आदेश पर सिविल कोर्ट रांची के नाजिर जीशान इकबाल ने मेन रोड स्थित रतन टाकीज के पास की 20 कड़ी जमीन पर शमीम अंसारी को दखल कब्जा दिलाया। उक्त जमीन पर विपक्षी साजदा खातून शाहिद और हमीदा वगैरह का अवैध कब्जा था।
साल 1967 में दर्ज हुआ था केस
इन लोगों के खिलाफ वर्ष 1967 में वाजिद अली ने रतन टाकीज के पास स्थित एम एस प्लाट नंबर 645 की 20 करी जमीन पर अपना दावा करते हुए सिविल कोर्ट में टाइटल सूट 1967 दर्ज कराया था। जिसकी सुनवाई करते हुए कोर्ट ने वर्ष 1973 में वाजिद अली के पक्ष में फैसला सुनाया था।
इसके बाद विपक्षी साजदा खातून वगैरह उस फैसला को हाई कोर्ट में चुनौती दिया। हाई कोर्ट द्वारा भी वाजिद अली के पक्ष में फैसला दिया गया। इस मामले की सुनवाई फिर से सिविल कोर्ट में चली।
दादा-पिता की कानूनी लड़ाई को पोते ने रखा जारी
मामले की सुनवाई के दौरान मुकदमा करने वाले वाजिद अली का निधन हो गया उसके बाद वाजिद अली के पुत्र कयूम अंसारी ने मुकदमे में अपने पिता वाजिद की कानूनी लड़ाई जारी रखा। मुकदमे की सुनवाई के दौरान कयूम अंसारी का भी निधन हो गया। इसके बाद अपने दादा वाजिद अली के दावे के समर्थन में उनका पोता शमीम अंसारी ने कानूनी लड़ाई को जारी रखा।
कब्जा दिलाते समय पुलिस रही मौजूद
59 वर्षों की लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद वाजिद अली के पोते शमीम अंसारी को उनकी अपनी जमीन पर दखल कब्जा मिल गया दखल कब्जा दिलाते समय दंडाधिकारी सैनिक डिगा और लीडर कमिश्नर प्रेम प्रकाश भी पुलिस फोर्स के साथ जमीन पर मौजूद थे।
दखल कब्जा पाने के लिए शमीम अंसारी ने एग्जिक्यूशन मुकदमा दर्ज कराया था। जिसके तहत कोर्ट ने पुलिस बल और दंडाधिकारी की मौजूदगी में उक्त जमीन पर शमीम अंसारी के पक्ष में दखल कब्जा दिलाने का निर्देश दिया था। |
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