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Gayatri Mantra: क्या 10 लाख जप से सच में मिटते हैं 3 जन्मों के पाप? जानें ब्रह्मवैवर्त पुराण का ये रहस्य

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गायत्री मंत्र के जप से कटते हैं जन्मों के पाप (Image Source:)



धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में मंत्र साधना का विशेष महत्व है, और उनमें भी गायत्री मंत्र (Gayatri Mantra) को सर्वोपरि माना गया है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, गायत्री मंत्र का जप न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि यह मनुष्य के संचित पापों का नाश करने वाला एक अमोघ अस्त्र भी है।
जप की संख्या और पापों का नाश

ब्रह्मवैवर्त पुराण के प्रकृति खंड के 23वें अध्याय में महर्षि पराशर ने राजा अश्वपति को गायत्री मंत्र के प्रभाव और जप के सामर्थ्य के बारे में विस्तार से बताया है। उनके अनुसार, जप की संख्या के आधार पर पापों का निवारण इस प्रकार होता है:

  • एक बार जप: गायत्री मंत्र का मात्र एक बार जप करने से उस पूरे दिन के दौरान किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं।


  • 10 बार जप: अगर कोई व्यक्ति 10 बार जप करता है, तो उसके दिन और रात (पूरे 24 घंटे) के पापों का शमन होता है।


  • 100 बार जप: 100 बार मंत्र जप करने से एक माह (महीने) के दौरान हुए पापों का निवारण होता है।


  • 1000 बार जप: एक हजार बार जप करने से पूरे सालभर के सभी दुख नष्ट हो जाते हैं।


  • एक लाख और अधिक: एक लाख बार जप करने से वर्तमान जन्म के पाप मिटते हैं, जबकि दस लाख जप करने से पिछले तीन जन्मों के पापों का नाश होता है।


  • करोड़ों में जप: एक करोड़ जप करने से सभी जन्मों के पाप मिट जाते हैं और दस करोड़ जप से मनुष्य जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है।

राजा अश्वपति की तपस्या और सती सावित्री का जन्म

मध्यप्रदेश के राजा अश्वपति सत्यवादी थे और उनकी पत्नी मालती एक धर्मपरायण स्त्री थीं, लेकिन वे संतान सुख से वंचित थे। उन्होंने महर्षि वशिष्ठ की सलाह पर सावित्री देवी (गायत्री) की आराधना शुरू की। अंतत: वे पुष्कर तीर्थ गए और वहां 100 सालों तक कठिन तप किया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर मां गायत्री ने उन्हें दर्शन दिए और कन्या प्राप्ति का आशीर्वाद दिया। यही कन्या आगे चलकर \“सती सावित्री\“ के नाम से विख्यात हुई।

  

(Image Source: AI-Generated)
जप की सही विधि

मंत्र का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इसे सही विधान से करना जरूरी है। जप करते समय क्या करना चाहिए:

  • पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।


  • अपना मस्तक थोड़ा झुकाकर और अपनी हथेली को \“अर्द्धमुद्रित सर्पफणाकृति\“ (सर्प के फन के समान आकार) बनाकर जप करना चाहिए।


  • जप के लिए श्वेत कमल के बीज या स्फटिक की माला का प्रयोग सबसे उत्तम बताया गया है।


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स्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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