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ये है दुनिया का पहला इंजीनियरिंग कॉलेज, 300 साल से ज्यादा पुराना है इतिहास

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सबसे पुराना इंजीनियरिंग कॉलेज।  



करियर डेस्क, नई दिल्ली। जब भी हम इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए विश्व की सबसे अच्छी इंजीनियरिंग कॉलेज की लिस्ट देखते हैं, तब हमारे दिमाग में आईआईटी, स्टैनफोर्ड और एमआईटी जैसी प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी का नाम सबसे पहले आता है। ये यूनिवर्सिटी न केवल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए बेहतरीन मानी जाती है, बल्कि वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भी इन्हें अच्छी रैंक मिली हुई है। लेकिन क्या आपके जहन में कभी यह सवाल आया है कि आखिर दुनिया की सबसे पहली इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी कौन-सी थी और यहां किन विषयों की पढ़ाई करवाई जाती थी?

अगर नहीं, तो आज इस लेख के जरिये हम आपको दुनिया की पहली इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी के साथ-साथ पांच सबसे पुरानी इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी के बारे में भी बताएंगे। साथ ही आपको यह भी बताएंगे कि इस पुरानी यूनिवर्सिटी में 300 साल पहले किस विषय की पढ़ाई करवाई जाती थी और अब इस यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए कौन-कौन से विषयों को शामिल किया गया है।
300 साल पुरानी इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी

चेक टेक्निकल यूनिवर्सिटी को दुनिया की पहली इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी होने का गौरव प्राप्त है। यूरोप की राजधानी प्राग में बसे इस यूनिवर्सिटी का इतिहास 300 साल से ज्यादा पुराना है। दुनिया की पहली इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना 18 जनवरी, 1707 में \“सम्राट जोसेफ प्रथम\“ ने की थी। उस समय चेक टेक्निकल यूनिवर्सिटी को एस्टेट्स इंजीनियरिंग स्कूल के नाम से जाना जाता था।
कैसे हुई यूनिवर्सिटी की शुरुआत

इस यूनिवर्सिटी के पहले प्रोफेसर क्रिश्चियन जोसेफ विलेनबर्ग थे। वह किलेबंदी के एक्सपर्ट माने जाते थे। साल 1705 की बात हैं, जब क्रिश्चियन जोसेफ विलेनबर्ग ने ऑस्ट्रिया के सम्राट से अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए उन्हें बताया कि वह इंजीनियरिंग कला में लोगों को शिक्षित करना चाहते हैं। इसलिए उन्हें 12 व्यक्तियों को शिक्षित करने की अनुमति दी जाए। इसके बाद 18 जनवरी, 1707 को सम्राट जोसेफ प्रथम ने चेक टेक्निकल यूनिवर्सिटी की स्थपाना की और इस तरह यह दुनिया का पहला इंजीनियरिंग कॉलेज बन गया।
ये हैं दुनिया के पांच सबसे पुराने इंजीनियरिंग कॉलेज

  • चेक टेक्निकल यूनिवर्सिटी (1707)
  • टीयू ब्राउनश्वेग यूनिवर्सिटी (1745)
  • फ्रीबर्ग यूनिवर्सिटी (1765)
  • इस्तांबुल टेक्निकल यूनिवर्सिटी (1773)
  • क्लॉस्टल यूनिवर्सिटी (1775)

किन विषयों की होती थी पढ़ाई

लगभग 300 साल पहले इस यूनिवर्सिटी में दो विषयों पर ज्यादा ध्यान दिया जाता था। पहला किलेबंदी और दूसरा सिविल इंजीनियरिंग। सिविल इंजीनियरिंग विषय के अंतर्गत छात्रों को सर्वे, मानचित्र बनाना और जल निकासी की पढ़ाई करवाई जाती थी। इसके बाद इस यूनिवर्सिटी में चार प्रमुख विभागों का निर्माण किया गया, जिसमें सिविल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, टेक्निकल केमेस्ट्री और पानी व सड़क निर्माण शामिल थे।

साल 1920 के बाद इस यूनिवर्सिटी में बिजनेस, एग्रीकल्चर, आर्ट्स, सांस्कृतिक इंजीनियरिंग, वास्तुकला एवं संरचनात्मक इंजीनियरिंग जैसे विषयों की पढ़ाई भी करवाई जाने लगी।
समय के साथ इंजीनिरिंग कोर्सेज में बदलाव

इस यूनिवर्सिटी में स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टोरल स्तर की पढ़ाई करवाई जाती है। मौजूदा समय में यहां लगभग 100 से ज्यादा विषयों की सुविधा है, जिसमें एयरोनॉटिकल एंड स्पेस इंजीनियरिंग, एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, ट्रैफिक कंट्रोल मैनेजमेंट, एप्लाइड साइंस इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग, ऑटोमेशन एंड इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग और पर्यावरण इंजीनियरिंग जैसे तमाम कोर्स शामिल है।
भारत का सबसे पुराना इंजीनियरिंग कॉलेज

भारत की सबसे पुरानी इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी का नाम आईआईटी रुड़की है। साल 1847 में रुड़की में एक इंजीनियरिंग स्कूल की स्थापना की गई थी। बाद में इसका नाम साल 1854 में \“थॉमसन कॉलेज ऑफ सिविल इंजीनियरिंग\“ रखा गया। आजादी के बाद भारत सरकार ने इस कॉलेज को इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी के रूप में मान्यता दी। जिसके बाद 21 सितंबर, 2001 को इस यूनिवर्सिटी को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) रुड़की घोषित किया गया।  

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