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1970 निजी स्कूलों पर आरटीई उल्लंघन का जुर्माना (फाइल फोटो)
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा शिक्षा विभाग ने आरटीई के तहत गरीब बच्चों को दाखिला न देने और दस्तावेज अपलोड न करने पर 1970 प्राइवेट स्कूलों पर जुर्माना लगाया था। अधिकांश स्कूलों ने जुर्माना नहीं भरा। अब मौलिक शिक्षा निदेशालय ने 17 फरवरी तक भुगतान न करने पर स्कूल की मान्यता रद करने की चेतावनी दी है।
स्कूल संचालक जुर्माने का विरोध कर रहे हैं, विभाग पर सूचना न देने का आरोप लगाते हुए इसे अन्याय बता रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत गरीब बच्चों को दाखिला नहीं देने और मान्यता के दस्तावेज पोर्टल पर समय पर अपलोड नहीं करने पर शिक्षा विभाग ने सितंबर में 1970 निजी स्कूलों पर 30 हजार से लेकर 70 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया था। अधिकतर स्कूल संचालकों ने आदेशों को नहीं माना। अब मौलिक शिक्षा निदेशालय ने जुर्माना भरने के लिए आखिरी चेतावनी देते हुए 17 फरवरी तक की समय सीमा निर्धारित कर दी है। इसके बाद जुर्माना नहीं भरने वाले सभी निजी स्कूलों की मान्यता रद कर दी जाएगी।
मौलिक शिक्षा निदेशालय की ओर से सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने स्तर पर उन स्कूलों पर कार्रवाई करें, जिन्होंने दाखिलों के समय गरीब बच्चों के लिए आरक्षित रिक्त सीटों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की थी। अगर 17 फरवरी तक इन स्कूलों ने जुर्माना राशि जमा नहीं की तो मान्यता रद करने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। जिन स्कूलों ने जुर्माना माफी के लिए निदेशालय में आवेदन किया हुआ है, उन्हें निरस्त समझा जाए।
वहीं, निजी स्कूल संचालकों ने जुर्माने का विरोध करते हुए कहा कि इस मामले में शिक्षा विभाग की भी लापरवाही रही है, क्योंकि उन्होंने मेल, टेलीफोन या लिखित सूचना के माध्यम से स्कूलों को समय रहते सूचित नहीं किया। अगर निजी स्कूल से अनजाने में कोई मिस्टेक हो जाए या समय पर कोई दस्तावेज अपलोड न कर पाएं तो उस स्कूल का पोर्टल बंद कर दिया जाता है। या फिर उस स्कूल पर जुर्माना लगा दिया जाता है।
यह सरासर निजी स्कूलों के साथ अन्याय है। अगर किसी स्कूल से दस्तावेज अपलोड करते समय किसी कागजात की कमी रह जाती है तो उसकी लिखित सूचना स्कूल को जरूर दी जाए। ताकि वह उस कमी को समय रहते पूरा कर सके। उन्होंने शिक्षा निदेशक से जुर्माना माफ करने की मांग दोहराई। |
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