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दिल्ली हाई कोर्ट ने बांग्लादेशी नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में सात साल से जेल में बंद आरोपी को जमानत दे दी है। फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने बांग्लादेशी नाबालिग से रेप के आरोप में सात साल से जेल में बंद आरोपी को बेल पर रिहा करने का आदेश दिया है। जस्टिस गिरीश कथपालिया की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि आरोपी को सिर्फ इसलिए हमेशा जेल में नहीं रखा जा सकता क्योंकि मामला प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज किया गया था।
कोर्ट ने कहा कि प्रॉसिक्यूशन रेप की तारीखों या समय के बारे में कोई डिटेल नहीं दे पाया। कोर्ट ने यह भी कहा कि फैक्ट्स बताते हैं कि शिकायत करने वाली महिला ने आरोपी के साथ सहमति से सेक्सुअल इंटरकोर्स किया था। यह कहते हुए, कोर्ट ने आरोपी को ₹10,000 के पर्सनल बॉन्ड और उतनी ही रकम की श्योरिटी पर बेल पर रिहा करने का आदेश दिया।
पिटीशन के मुताबिक, नाबालिग बांग्लादेश की रहने वाली है और सिर्फ बंगाली बोलती है। उसने कहा कि आरोपी उसे नौकरी दिलाने के बहाने दिल्ली लाया और वहां उसने और दो अन्य लोगों ने उसके साथ कई बार रेप किया।
उसने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने उसका नाम जाली बनाया और फिर उसे फरीदा बेगम नाम की एक महिला के लिए नौकरी दिलाने के लिए जयपुर ले गया। फरीदा बेगम और उनके पति के बीच झगड़ा हुआ और वह वहां से भागकर पुलिस स्टेशन चली गईं।
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