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प्रेशर पाइप से हवा भरकर फाड़ी गई थी युवक की आंतें, गाजियाबाद फैक्ट्री हत्याकांड मामला में आरोपी को 10 साल कैद

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शुक्रवार को कोर्ट ने आरोपी प्रमोद को 10 साल कैद और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। फाइल फोटो



जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। पांच साल पहले लिंक रोड थाना इलाके की एक फैक्ट्री में साथी कर्मचारी ने प्रेशर पाइप से एक युवक के अंदरूनी अंगों में हवा भर दी थी। इससे युवक की आंतें फट गईं। 13 दिन बाद इलाज के दौरान युवक की मौत हो गई। शुक्रवार को कोर्ट ने आरोपी को 10 साल की कैद और 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।

कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को घटना की CCTV फुटेज नष्ट करने और समय पर पुलिस को सूचना न देने पर कंपनी मालिक और मैनेजमेंट के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया है। DGP और पुलिस कमिश्नर को CCTV फुटेज हासिल करने में लापरवाही बरतने और कंपनी मैनेजमेंट को आरोपी न बनाने पर मामले के जांच अधिकारी इंस्पेक्टर के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
क्या है मामला?

18 अप्रैल 2021 को पिलखुआ के सुल्तान मोहल्ला की रहने वाली राजरति ने लिंक रोड थाने में शिकायत दी कि 14 अप्रैल की रात को उसके बेटे 20 साल के प्रिंस के साथ PRG इंटरनेशनल इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड में काम करने वाले साथी प्रमोद ने मारपीट की और उसकी आंतों में प्रेशर पाइप से हवा भर दी, जिससे उसकी आंतें फट गईं। प्रिंस अभी गंभीर हालत में क्लियर मेडी हॉस्पिटल में भर्ती है।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर प्रमोद को गिरफ्तार कर लिया। 26 अप्रैल को इलाज के दौरान प्रिंस की मौत हो गई। मौत से पहले प्रिंस ने पुलिस को बताया कि घटना वाली रात फैक्ट्री में मशीन डाई खोलने को लेकर उसका प्रमोद से झगड़ा हुआ था। इसी झगड़े में प्रमोद और अन्य लोगों ने प्रेशर पाइप से उसके अंदरूनी अंगों में हवा भर दी।

मामले में ADJ-6 के जज अरविंद मिश्रा ने सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर साहिबाबाद के रहने वाले प्रमोद को दोषी करार देते हुए 10 साल कैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने प्रमोद पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जिसका 90 परसेंट पैसा मृतक की मां को देने का आदेश दिया गया।
कंपनी मालिक और पुलिस इंस्पेक्टर के खिलाफ कार्रवाई का आदेश

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कंपनी मालिक और मैनेजमेंट ने 14 अप्रैल को घटना के बाद पुलिस को जानकारी नहीं दी और मामले में अहम सबूत CCTV फुटेज भी नष्ट कर दिया। कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को जांच करने और मैनेजमेंट और मालिक के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया।

मैनेजमेंट घटना वाली रात प्रिंस को पास के अस्पताल ले गया लेकिन उसे भर्ती नहीं किया। जांच अधिकारी, इंस्पेक्टर प्रताप सिंह तोमर ने जानकारी मिलने के बावजूद कंपनी को CCTV फुटेज देने के लिए नोटिस जारी करने में देरी की और जानबूझकर कंपनी पर उसके कामों के लिए आरोप नहीं लगाया, जो जांचकर्ता की बड़ी लापरवाही मानी जाएगी और कंपनी को फायदा पहुंचाया जाएगा।

कोर्ट ने जांचकर्ता की भूमिका के बारे में जरूरी कार्रवाई के लिए आदेश की एक कॉपी पुलिस महानिदेशक और पुलिस कमिश्नर को भेजने का भी आदेश दिया।

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