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50% को पीएम किसान सम्मान की राशि पर संकट, आधे लाभुकों की अब तक नहीं बनी फार्मर आईडी

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Farmer ID Bihar: शिविर लगाए जाने के बावजूद अपेक्षित भागीदारी नहीं मिल रही। फाइल फोटो



संवाद सूत्र, सिकटा (पश्चिम चंपारण)। Bihar Farmer Registry: सिकटा प्रखंड में करीब 50 प्रतिशत किसानों की अब तक फार्मर आईडी नहीं बन सकी है। ऐसे में बड़ी संख्या में किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की अगली किस्त से वंचित रहना पड़ सकता है। पंचायत स्तर पर शिविर लगाए जाने के बावजूद अपेक्षित भागीदारी नहीं मिल रही है।
80 प्रतिशत लक्ष्य निर्धारित

प्रखंड में चल रहे फार्मर रजिस्ट्रीकरण के तीसरे चरण में 80 प्रतिशत लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन अब तक मात्र 56 प्रतिशत किसानों ने ही अपना रजिस्ट्रेशन कराया है। अधिकारियों का कहना है कि समय रहते पंजीकरण नहीं कराने पर किसानों को सरकारी योजनाओं के लाभ में परेशानी हो सकती है।

प्रखंड विकास पदाधिकारी अजीत कुमार रौशन ने बताया कि पंचायतों में शिविर आयोजित कर लगातार प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। इसके बावजूद आधे से अधिक किसान अभी भी फार्मर रजिस्ट्री से दूर हैं।
500 करोड़ की अनुदान राशि पर असर

नियमानुसार बिहार में 50 प्रतिशत से अधिक किसानों की फार्मर आईडी बनना आवश्यक है। ऐसा नहीं होने पर केंद्र सरकार से राज्य को मिलने वाली करीब 500 करोड़ रुपये की अनुदान राशि प्रभावित हो सकती है। इससे राज्य के किसानों को मिलने वाले लाभ पर भी असर पड़ेगा।

बीडीओ ने किसानों से अपील की है कि वे 21 फरवरी की निर्धारित समय-सीमा से पहले अपना फार्मर आईडी बनवाना सुनिश्चित करें। इसके लिए सभी पंचायत भवनों में विशेष शिविर लगाकर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जारी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि समय पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराने वाले किसानों को भविष्य में योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाई हो सकती है।
फार्मर आईडी के मुख्य लाभ
1. योजनाओं का सीधा और पारदर्शी लाभ (Direct Benefit)

बिचौलियों से मुक्ति: पीएम-किसान, खाद सब्सिडी जैसी योजनाओं की राशि सीधे आधार-लिंक बैंक खाते में पहुंचेगी।

सही पात्रता की पहचान: सरकार को जमीन और किसान की वास्तविक स्थिति की जानकारी रहेगी, जिससे कागजी प्रक्रिया कम होगी।
2. खेती के लिए आसान कर्ज (Easy KCC/Loans)

तेज लोन प्रक्रिया: किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) या बैंक ऋण के लिए बार-बार जमीन के कागजात जमा करने की जरूरत नहीं होगी।

बैंक डिजिटल रिकॉर्ड देखकर शीघ्र स्वीकृति दे सकेंगे।
3. खाद और बीज की उपलब्धता

सब्सिडी का सही लाभ: सरकारी दुकानों से खाद और उन्नत बीज वास्तविक किसानों को ही मिलेंगे।

कालाबाजारी पर रोक लगेगी।
4. फसल बीमा और मुआवजा (Insurance & Compensation)

सटीक नुकसान आकलन: बाढ़ या सूखे की स्थिति में दर्ज फसल विवरण के आधार पर तुरंत मूल्यांकन।

तेज क्लेम निपटान: बीमा कंपनी को डिजिटल जानकारी मिलने से भुगतान में देरी कम होगी।
5. MSP पर फसल बिक्री आसान

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अनाज बेचने के लिए बार-बार पंजीकरण की जरूरत नहीं।

आईडी से जमीन और उत्पादन क्षमता का सत्यापन स्वतः संभव।
6. आधुनिक कृषि सेवाओं तक पहुंच

मोबाइल पर मिट्टी की सेहत, मौसम अपडेट और फसल अनुसार कृषि सलाह सीधे प्राप्त होगी।

डेटा आधारित सेवाओं से उत्पादकता बढ़ेगी।
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