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17 साल के निर्वासन के बाद तारिक रहमान की वापसी
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। छात्र आंदोलन के चलते पांच अगस्त, 2024 को शेख हसीना की अगुआई वाली अवामी लीग सरकार के अपदस्थ होने के बाद बांग्लादेश में गुरुवार को पहला आम चुनाव कराया गया।
हसीना के बगैर हुए इस चुनाव का शुक्रवार को जनादेश आ गया। जनता ने दिवंगत खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) पर भरोसा जताया है।
वह ऐतिहासिक जीत और दो तिहाई बहुमत के साथ 20 साल बाद देश की सत्ता में वापसी करने जा रही है। खालिदा के बेटे तारिक रहमान पहली बार प्रधानमंत्री बन सकते हैं।
18 महीने के शासन का अंत
नई सरकार के गठन के साथ ही मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के करीब 18 महीने के शासन का अंत हो जाएगा। नतीजों से जाहिर होता है कि मतदाताओं ने कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी और छात्र आंदोलन से उपजी नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) को ठुकरा दिया है।
बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 299 सीटों के लिए हुए संसदीय चुनाव में बीएनपी और सहयोगी दलों को 212 सीटें मिली हैं।
पाकिस्तान के साथ निकटता रखने वाली जमात-ए-इस्लामी पार्टी नीत गठबंधन को 77 सीटों पर जीत मिली है। जमात गठबंधन में शामिल एनसीपी महज छह सीटों पर सिमट गई है।
जबकि अवामी लीग चुनाव में हिस्सा नहीं ले पाई, क्योंकि उस पर चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया गया था। चुनाव आयोग ने अभी तक चुनाव नतीजों की औपचारिक घोषणा नहीं की है।
18 साल के निर्वासन के बाद तारिक रहमान की वापसी
18 साल बाद गत दिसंबर में लंदन से स्वदेश लौटने वाले 60 वर्षीय तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगुरा-6 निर्वाचन क्षेत्रों से जीत हासिल की है। गत 30 दिसंबर को मां खालिदा के निधन के बाद उन्होंने पार्टी की बागडोर संभाली थी।
बीएनपी पहले ही घोषणा कर चुकी है कि चुनाव जीतने पर पार्टी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान प्रधानमंत्री बनेंगे। रायटर के अनुसार, बीएनपी ने अपने समर्थकों से जीत का जश्न मनाने से बचने और शुक्रवार की नमाज पढ़ने को कहा। पार्टी ने एक बयान में कहा, \“ऐतिहासिक जीत के बावजूद जश्न मनाने के लिए कोई जुलूस या रैली नहीं निकाली जाएगी।\“
ये चुनाव ऐसे समय कराए गए हैं, जब देश उथल-पुथल भरी राजनीतिक शून्यता, अस्थिरता और सुरक्षा की नाजुक स्थिति से गुजर रहा है।
देश में जुलाई-अगस्त, 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए भारी विरोध प्रदर्शनों और अल्पसंख्यकों खासतौर पर हिंदुओं को बड़े पैमाने पर निशाना बनाया जा रहा है। छात्रों के आंदोलन के चलते ही शेख हसीना को 15 साल के शासन के बाद सत्ता से हटना पड़ा था। वह उसी समय से भारत में रह रही हैं।
जनमत संग्रह में 60 प्रतिशत लोगों ने कहा \“हां\“13वें संसदीय चुनावों के साथ ही गुरुवार को 84 सूत्रीय सुधार पैकेज पर जनमत संग्रह भी कराया गया।
करीब 60 प्रतिशत से ज्यादा लोगों ने संवैधानिक संशोधन से जुड़े इस सुधार पैकेज के पक्ष में \“हां\“ कहा है। अंतरिम सरकार ने जुलाई चार्टर के इन ¨बदुओं पर चुनाव के साथ ही जनमत संग्रह कराने की घोषणा की थी।
हारने पर लगाए धांधली के आरोप
चुनाव में 11 दलों का गठबंधन बनाकर उतरने वाली जमात-ए-इस्लामी ने शुक्रवार को धांधली और नतीजों में हेरफेर के आरोप लगाए हैं। उसने यह चेतावनी दी है कि अगर जनता का जनादेश छीना गया तो वह बड़े पैमाने पर आंदोलन करेगी।
पार्टी के सहायक महासचिव अहसानुल महबूब जुबैर ने आरोप लगाया कि मतगणना अधिकारी एक विशेष पार्टी के पक्ष में परिणामों में जानबूझकर देरी कर रहे हैं। एनसीपी ने भी ढाका की कई सीटों के नतीजों में धांधली के आरोप लगाए हैं।
कभी बीएनपी के साथ ही रही जमात
बीएनपी पिछली बार 2001 से 2006 तक सत्ता में थी। 2001 के चुनाव में उसने 193 सीटें जीती थीं। तब खालिदा जिया प्रधानमंत्री बनी थीं। उस समय जमात-ए-इस्लामी बीएनपी के साथ थी।
सरकार में उसके दो नेता मंत्री के रूप में कार्यरत थे। शेख हसीना सरकार के दौरान 2013 में जमात पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। 2024 में अंतरिम सरकार गठित होने पर जमात पर से प्रतिबंध हटा लिया गया था। 2026 के चुनाव में बीएनपी और जमात में मुख्य मुकाबला माना गया था।
कई देशों ने रहमान को दी बधाईसंसदीय चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने पर बीएनपी और उसके नेता तारिक रहमान को भारत समेत कई देशों ने बधाई दी है। ढाका में अमेरिकी दूतावास के अलावा चीन और पाकिस्तान समेत कई देशों ने बीएनपी नेता को जीत पर बधाई दी है।
एक नजर में चुनाव
एक प्रत्याशी के निधन के चलते 299 सीटों पर हुए चुनाव, 151 सीट जीतने पर सामान्य बहुमत- 350 सदस्यीय संसद की 300 सीटों के लिए सीधे चुनाव होते हैं,
50 महिलाओं के लिए आरक्षित- 50 राजनीतिक दलों के 1755 व 273 निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई- 12.7 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से लगभग 60 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया |
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