योगी सरकार का आर्थिक विजन, बुनियादी ढांचे से 1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था की ओर
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश का नवीनतम बजट केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि राज्य की आर्थिक दिशा बदलने वाला एक विजन दस्तावेज है। योगी सरकार ने वित्तीय अनुशासन और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर निवेश को प्राथमिकता देकर यह स्पष्ट कर दिया है कि उसका लक्ष्य उपभोग-आधारित अर्थव्यवस्था के बजाय निवेश-आधारित विकास मॉडल है। $1 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ते यूपी के इस सफर में आर्थिक स्थिरता, प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि और गरीबी उन्मूलन जैसे मानक कितने प्रभावी रहे हैं? प्रस्तुत है, इस बजट की बारीकियों पर देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों की गहन राय।
- परिलक्षित होती है आर्थिक स्थिरता
योगी सरकार ने बजट से पहले सदन में आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत करके एक स्वस्थ परंपरा शुरू की है, जिसमें एक ट्रिलियन डालर अर्थव्यवस्था तक पहुंचने का रोडमैप भी दिखाई देता है। उत्तर प्रदेश के 2026-27 के बजट में इसका प्रतिबिंब दिखाई देता है। राज्य सरकार ने लोक लुभावन बजट देने के बजाय दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती और क्षमता वृद्धि पर ध्यान दिया है। पूंजीगत परिव्यय पर पौने दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान है, जिससे इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलेगा। सड़क, एक्सप्रेस-वे, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक कॉरिडोर, सिंचाई और ऊर्जा पर बड़े आवंटन यह प्रदर्शित करते हैं कि सरकार निजी निवेश को लेकर आधारभूत ढांचा मजबूत करना चाहती है। इन बुनियादी सुविधाओं की वजह से निवेशक राज्य में आने के प्रति आग्रही होंगे। प्रदेश की जीएसडीपी 30.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है और इसमें 13.4 प्रतिशत की वृद्धि दर है जो स्पष्ट दिखाता है कि विकास केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी धरातल पर भी है। प्रति व्यक्ति आय 1,09,844 रुपये तक पहुंचना और आगे 1,20,000 रुपये का अनुमान राज्य की आर्थिकी का सकारात्मक पक्ष है। मेरे विचार में यूपी सरकार ने एक ऐसा बजट प्रस्तुत किया है, जिसमें राज्य की आर्थिक स्थिरता परिलक्षित होती है।
शरद कोहली, आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ
- भविष्य उन्मुख अर्थव्यवस्था की ओर
योगी सरकार के बजट को समग्रता से देखें तो इसमें यह संदेश निहित है कि उत्तर प्रदेश अब निवेश आधारित, स्थिर और भविष्य उन्मुख अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। सरकार किसी को मछली देने के बजाय उसमें मछली पकड़ने की क्षमता विकसित करने में विश्वास रखती है और इसीलिए इस बजट को लोक लुभावन न रखते हुए क्षमता वृद्धि पर जोर दिया गया है। विकास की दीर्घकालिक सोच इसे विशिष्ट बनाती है और एक ट्रिलियन डालर अर्थ व्यवस्था की ओर ले जाती प्रतीत होती है। पूंजीगत व्यय में भारी-भरकम धनराशि के प्रावधान से आधारभूत ढांचा मजबूत होगा और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव और 15 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं का क्रियान्वयन यह संदेश देता है कि राज्य अब निवेश के आधार पर भविष्य उन्मुख अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। नौ वर्षों में योगी सरकार ने इस बात का प्रयास किया है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर स्थित हर व्यक्ति तक पहुंचे। लगभग 06 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालना और बेरोजगारी दर का 2.24 प्रतिशत तक आना इस बात का प्रमाण है। बजट की बहुत सारी योजनाओं में केंद्र और राज्य सरकार का समन्वय प्रदेश में विकास की निरंतरता को बनाए रखेगा।
दीप्ति तनेजा, इकॉनमिस्ट, दिल्ली विश्वविद्यालय
- स्थिर और दीर्घकालिक विकास मॉडल
उत्तर प्रदेश का 2026-27 का बजट दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और संरचनात्मक परिवर्तन पर केंद्रित है जो राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक स्पष्ट और दूरदर्शी रोडमैप प्रस्तुत करता है। यह दृष्टिकोण ही किसी बड़े राज्य को स्थायी विकास की दिशा में आगे बढ़ाता है। बजट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है—इन्फ्रास्ट्रक्चर और पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) पर स्पष्ट जोर। सड़कों, एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स और शहरी ढांचे में निवेश का अर्थ है भविष्य की उत्पादन क्षमता को मजबूत करना। सामाजिक संकेतक भी उत्साहजनक हैं। लगभग 6 करोड़ लोगों का गरीबी रेखा से ऊपर आना और बेरोजगारी दर का घटकर 2.24 प्रतिशत तक पहुंचना बताता है कि विकास समावेशी स्वरूप ले रहा है। समग्र रूप से यह बजट राज्य को उपभोग आधारित नहीं, बल्कि निवेश आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में अग्रसर करने वाला दस्तावेज है। नीतिगत स्थिरता और प्रशासनिक क्रियान्वयन क्षमता का ही परिणाम है 50 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव। आर्थिक अनुशासन और वित्तीय प्रबंधन पर विशेष ध्यान होने की वजह से ही राजकोषीय घाटे को 3 प्रतिशत की सीमा में रखा जा सका है। यह बजट स्पष्ट संकेत देता है कि उत्तर प्रदेश अब मजबूत, स्थिर और दीर्घकालिक विकास मॉडल की ओर बढ़ रहा है जो राज्य के आर्थिक लक्ष्यों की पूर्ति एक बड़ा पड़ाव साबित होगा।
प्रो. शिरीष मिश्र, केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी
- विकास का लाभ अंतिम पायदान तक
योगी सरकार के बजट और आर्थिक सर्वेक्षण को साथ रखकर देखा जाए तो यह स्पष्ट होता है कि सरकार ने राजकोषीय अनुशासन और विकास के बीच संतुलन बनाने की गंभीर कोशिश की है। यह बजट दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता की दिशा में संरचनात्मक बदलाव का संकेत देता है। पूंजीगत व्यय पर निरंतर और स्पष्ट फोकस बताता है कि सरकार बुनियादी ढांचे को विकास का इंजन मानते हुए आगे बढ़ रही है। सड़क, एक्सप्रेस-वे, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक कॉरिडोर, सिंचाई और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में बड़े आवंटन निजी निवेश के लिए मजबूत आधार तैयार करते हैं। प्रदेश की जीएसडीपी का 30.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचना और 13.4 प्रतिशत की वृद्धि दर इस बात का संकेत है कि विकास की गति स्थिर बनी हुई है। प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि और उसे 1.20 लाख रुपये तक ले जाने का लक्ष्य आय सृजन और आर्थिक क्षमता विस्तार की दिशा को दर्शाता है। लगभग 6 करोड़ लोगों का गरीबी रेखा से बाहर आना और बेरोजगारी दर का 2.24 प्रतिशत तक सिमटना यह दिखाता है कि विकास का लाभ अंतिम पायदन पर खड़े व्यक्ति तक पहुंच रहा है। ‘फियरलेस गवर्नेंस’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ ने बिजनेस स्टेबिलिटी को मजबूत किया है जो उद्यमियों को राज्य में निवेश के लिए प्रेरित करेगा।
प्रो. एस.वी. पाठक, गोरखपुर विश्वविद्यालय |