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हिमाचल प्रदेश में सिरिंज की बिक्री पर लगी रोक तो नशेड़ियों की अस्पतालों पर नजर, शिमला में 10 युवा चोरी करते पकड़े

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शिमला के अस्पतालों से सिरिंज चोरी की घटनाएं सामने आनी लगी हैं। प्रतीकात्मक फोटो  



जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकार की ओर से बाजार में सिरिंज की बिक्री पर रोक के बाद नशे की लत से ग्रस्त युवक-युवतियों ने अब अस्पतालों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। राजधानी शिमला के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में सिरिंज चोरी के लगातार सामने आ रहे मामलों ने स्वास्थ्य तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

चौंकाने वाली बात यह है कि ये सिरिंज कथित तौर पर चिट्टे (सिंथेटिक ड्रग) के सेवन के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं।
सिरिंज गायब होने पर सतर्क हुए तो पकड़े गए 10 युवा

सूत्रों के अनुसार, जब अस्पतालों के वार्डों और स्टोर से सिरिंज लगातार गायब होने लगीं तो प्रबंधन को शक हुआ। अस्पताल प्रशासन ने पहले अपने स्तर पर जांच की कि कहीं ये सिरिंज अस्पताल के कर्मचारी तो गायब नहीं कर रहे। इसके बाद निगरानी बढ़ाई और जांच में कई हैरान करने वाले तथ्य सामने आए। इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज एवं अस्पताल (आइजीएमसी) और दीन दयाल उपाध्याय (डीडीयू) अस्पताल में सिरिंज चोरी करते हुए नशे के आदी लगभग 10 युवक-युवतियां पकड़े गए।
डीडीयू में 16 साल की नाबालिग पकड़ी

सबसे गंभीर मामला डीडीयू अस्पताल में सामने आया, जहां 16 वर्षीय नाबालिग लड़की वार्ड से सिरिंज चोरी करते हुए रंगे हाथ पकड़ी गई। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार यह कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि ऐसे कई मामले पहले भी पकड़े जा चुके हैं। केवल इसी सप्ताह दो और लोग सिरिंज चोरी करते हुए पकड़े गए हैं। इनमें एक नगर निगम शिमला का कर्मचारी भी शामिल बताया जा रहा है।
संक्रमण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी खतरा

अस्पताल प्रशासन ने इसकी पुलिस थाना सदर में शिकायत दी है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नशे का जाल इस कदर फैल चुका है। बाजार में सिरिंज की बिक्री पर रोक लगने के बाद नशे के आदी लोग वैकल्पिक रास्ते तलाश रहे हैं और अस्पतालों से चोरी उसी का परिणाम है। यह न केवल अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर असर डाल रहा है बल्कि संक्रमण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है।  
क्या कहते हैं चिकित्सा अधिकारी


अस्पताल में सिरिंज चोरी के कई मामले सामने आए हैं। अब प्रत्येक सिरिंज का हिसाब रखा जा रहा है। जरूरत के अनुसार ही सिरिंज का वितरण किया जाता है।
- डा. लोकेंद्र शर्मा, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक, डीडीयू अस्पताल।
  
पैरामेडिकल स्टाफ की जिम्मेदारी तय कर दी है। अब सिरिंज का इस्तेमाल आवश्यकता के आधार पर किया जा रहा है। हर वितरण का पूरा विवरण दर्ज किया जा रहा है।
डा. राहुल राव, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक, आइजीएमसी।


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