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हरियाणा में दो लाख आवारा कुत्तों का खौफ, बढ़ती संख्या बनी चुनौती; नियंत्रण के लिए नहीं उठा रहे सख्त कदम

deltin33 1 hour(s) ago views 440
  

हरियाणा में दो लाख आवारा कुत्तों का खौफ। फाइल फोटो



राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा के शहरों में आवारा कुत्तों का खौफ बढ़ता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद आवारा कुत्तों पर नियंत्रण पाने के सख्त उपाय अभी तक नहीं किए जा सके हैं। राज्य के शहरी निकायों में करीब दो लाख आवारा कुत्तों की संख्या दर्ज की गई है।

इनकी बढ़ती संख्या शहरी निकायों के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। कई शहरों में डाग शेल्टर या पाउंड तो कार्यरत हैं, लेकिन उनकी क्षमता सीमित है। कई शहरों में नसबंदी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) कार्यक्रम भी संचालित हैं, लेकिन अभी तक उसके अच्छे नतीजे सामने नहीं आए हैं।

जिन शहरी निकायों में 20 से 50 हजार कुत्ते हैं, वहां नसबंदी केंद्रों की कम संख्या और कम क्षमता के चलते इनकी संख्या में कमी होने की बजाय लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

आवारा कुत्तों की संख्या बड़े नगर निगम क्षेत्रों में सबसे अधिक है। गुरुग्राम व फरीदाबाद नगर निगम में आवारा कुत्तों की संख्या 50-50 हजार से अधिक है। इसी तरह यमुनानगर में 28 हजार, सोनीपत में 18 हजार, पानीपत में 16 हजार तथा करनाल नगर निगम क्षेत्र में 12 हजार से अधिक आवारा कुत्ते हैं।

पंचकूला में 12 हजार, रोहतक में आठ हजार, हिसार में 10 हजार और मानेसर नगर निगम में यह संख्या आठ हजार के आसपास है। छोटे नगरों हांसी में दो हजार, गन्नौर में 1100, गोहाना में 1,729, समालखा में ढ़ाई हजार, कालका में 2,600, पटौदी जटोली मंडी में 750, फरुर्खनगर में 800, निसिंग में 205, तरावड़ी में 510, नीलोखेड़ी में 324 और असंध में 221 आवारा कुत्ते हैं।

कई शहरों में डाग शेल्टर या पाउंड कार्यरत हैं, लेकिन उनकी क्षमता सीमित है। गुरुग्राम में दो शेल्टर हैं, लेकिन उनकी क्षमता सिर्फ 100 है और चार एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) केंद्र हैं, मगर उनकी क्षमता 500 हैं। फरीदाबाद में शेल्टर निर्माणाधीन है और 600 की क्षमता वाला एक एबीसी केंद्र है। करनाल में दो एबीसी केंद्र हैं, जिनकी क्षमता मात्र 150 है।

पानीपत में तीन शेल्टर हैं, जिनकी क्षमता 1200 है और 200 की क्षमता वाले दो एबीसी केंद्र हैं। यमुनानगर में 300 कुत्तों की क्षमता वाले तीन शेल्टर हैं। कई नगरों रोहतक, कलानौर, महम में टेंडर प्रक्रिया बाधित या रद हो गई।

पहली जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच बड़ी संख्या में कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और टैगिंग की गई। गुरुग्राम में 6,152, पानीपत में 6,850, करनाल में 4,915, सोनीपत में 4,791, फरीदाबाद में 4,500 हिसार में 1,599, पंचकूला में 933 तथा यमुनानगर में 435 कुत्तों की नसबंदी व टीकाकरण किया गया।

कई छोटे नगरों में नसबंदी का आंकड़ा शून्य या बेहद कम है। इनमें नारनौंद, उकलाना, बरवाला, असंध, निसिंग, तरावड़ी व नीलोखेड़ी जैसे निकाय शामिल हैं।

जिन शहरों में 20 से 50 हजार कुत्ते हैं, वहां एबीसी केंद्रों की क्षमता कुछ सौ तक सीमित है। कई स्थानों पर पाउंड या शेल्टर अभी निर्माणाधीन हैं। खुले कचरे और खाद्य अपशिष्ट से कुत्तों की संख्या नियंत्रित करना कठिन हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर एनमिल बर्थ कंट्रोल (डाग्स) रूल के पालन पर जोर दिया है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आवारा कुत्तों को बिना प्रक्रिया हटाया या स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। उन्हें पकड़कर नसबंदी, टीकाकरण और पहचान टैगिंग के बाद नियमानुसार छोड़ा या पुनर्वासित किया जाना चाहिए। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों अस्पताल, स्कूल, न्यायालय परिसर में सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की भी हिदायत दी गई है, मगर बंदोबस्त कम होने की वजह से यह उपाय सुनिश्चित नहीं किए जा रहे हैं।
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