हमीरपुर में ठाकुर राम सिंह की जयंती पर मंच पर जेपी नड्डा व प्रेम कुमार धूमल सहित अन्य। जागरण
जागरण संवाददाता, हमीरपुर। ठाकुर राम सिंह इतिहास शोध संस्थान नेरी में ठाकुर राम सिंह की 111वां जयंती समारोह मनाया गया। इस उपलक्ष्य पर मुख्यातिथि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा उपस्थित रहे। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल वशिष्ट अतिथि रहे। दोनों नेता लंबे समय बाद एक मंच पर दिखे। कार्यक्रम में अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सुरेश सोनी मुख्य वक्ता रहे।
अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा कार्यक्रम के अध्यक्ष रहे। डा. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय विश्वविद्यालय पूसा बिहार के कुलाधिपति डा. प्रेम लाल गौतम, शोध संस्थान अध्यक्ष प्रो. भाग चन्द चौहान एवं निदेशक व संगठन सचिव डा. चेतराम गर्ग मंचासीन रहे।
इस कार्यक्रम से पूर्व ठाकुर राम सिंह की प्रतिमा का अनावरण, शोध संस्थान के कार्य का डिजिटलीकरण व संस्थान द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया गया।
आने वाली पीढ़ियों को सदा के लिए प्रेरणा
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने ठाकुर राम सिंह को स्मरण करते हुए कहा कि आज ऐसी शख्सियत की जयंती मना रहे हैं जो आने वाली पीढ़ियों को सदा-सदा के लिए प्रेरणा देती रहेगी। हम सभी जानते हैं कि भारत की 20वीं शताब्दी कैसी रही है, उन परिस्थितियों में 1941 में एक युवा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क में आया और अपना पूरा जीवन राष्ट्र सेवा को समर्पित कर दिया।
88 वर्ष की आयु में इतिहास संकलन जैसे नए प्रकल्प को शुरू करना और उसे पूरा करना ठाकुर रामसिंह की दृढ़ इच्छा शक्ति एवं संगठन कौशल को दर्शाता है। आज शोध संस्थान उनके दिखाए मार्ग पर आगे बढ़ रहा है और उच्च कोटि का शोध कार्य कर रहा है।
लोक परंपराओं को नई पहचान भी दिलाई : सुरेश सोनी
मुख्य वक्ता सुरेश सोनी ने कहा कि हम आज ऐसे इतिहासकार का 111वां जन्मदिवस का स्मरण करने के लिए एकत्रित हुए हैं जिन्होंने अपने लेखन से न केवल हिमाचल की सांस्कृतिक चेतना को स्वर दिया, बल्कि इतिहास और लोक परंपराओं को नई पहचान भी दिलाई। भारत की परंपरा रही है कि चुपचाप आओ, अपना योगदान दो और आगे जाओ, राम सिंह इसी परंपरा के संवाहक थे।
राम सिंह हमारे मनस्वी थे : विश्वकर्मा
कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने कहा कि ठाकुर राम सिंह हमारे मनस्वी थे। उन्होंने इतिहास के लिए स्वयं को समर्पित किया था। 1994, 1995 व 1996 में इतिहास संकलन के तीन बड़े अधिवेशन ठाकुर राम सिंह के नेतृत्व में हुए थे। उनके साथ की स्मृतियां आज भी हमें इतिहास संकलन योजना के कार्य में आज भी मार्गदर्शन करती हैं। विकसित भारत 2047 में हम इतिहासकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है, क्योंकि यदि हम भारतीय जनमानस को प्रामाणिक इतिहास नहीं दे पाए तो भारत की आत्मा पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाएगी।
रामसिंह ने इतिहास को नई दिशा दी : धूमल
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि ठाकुर राम सिंह का व्यक्तित्व बहुत महान था और इतिहास के लिए उन्होंने जो कुछ किया व स्वयं इतिहास बन गया। उनके संपर्क में जो भी आता था प्रभावित हुए बिना नहीं रहता था। 88 वर्ष की आयु में शोध संस्थान की स्थापना का लिया संकल्प आज फलीभूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि ठाकुर रामसिंह ने इतिहास को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि ठाकुर रामसिंह जी को मैं हृदय से नमन करता हूं कि उनका जीवन हम सबके लिए एक प्रकाश स्तम्भ है जो हमें अपनी संस्कृति, इतिहास और मूल्यों से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है।
इन पुस्तकों का विमोचन
इस अवसर पर संस्थान द्वारा प्रकाशित ‘स्मारिका: वार्षिक प्रतिवेदन (2025- 26)’, तथा पांच पुस्तकें ‘ऋग्वेद में पश्चिमी हिमालय के संदर्भ’ संपादक डा. ओम दत्त सरोच, अमित शर्मा, शशि शर्मा, ‘हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत’, संपादक बारू राम ठाकुर, मिहिर बोराना, ‘हिमाचल प्रदेश के गांव’ संपादक डॉ. राकेश कुमार शर्मा, ऋषि कुमार, ‘ लेखक डॉ. बिन्दू साहनी, संपादक राजेन्द्र कुमार व बिन्दू साहनी का विमोचन किया गया। कार्यक्रम के अंत में शोध संस्थान के अध्यक्ष प्रो. भाग चंद चौहान ने उपस्थित सभी गणमान्यों अतिथियों का धन्यवाद किया।
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