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प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना: पढ़ाई के साथ रोजगार की समझ विकसित कर रहे हरियाणा के युवा; पंजाब पिछड़ा

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पढ़ाई के साथ रोजगार की समझ विकसित कर रहे हरियाणा के युवा। फाइल फोटो



राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। उत्तरी भारत के तीन राज्यों हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना का अलग-अलग असर देखने को मिल रहा है। संसद में रखी गई रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा में योजना सबसे अधिक कारगर रूप से चल रही है।

कॉलेज खत्म होते ही रोजगार की चिंता शुरू हो जाती है। डिग्री मिलती है, लेकिन उद्योग का अनुभव नहीं होता। इसी समस्या को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना शुरू की है, ताकि युवा पढ़ाई के दौरान ही उद्योगों का व्यावहारिक अनुभव हासिल करें और नौकरी के बाजार को समझ सकें।

दो राउंड के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना को हरियाणा ने मौके के रूप में लपका है। पंजाब में अपेक्षित सक्रियता नजर नहीं आई। हिमाचल प्रदेश में भी यह योजना उतनी असरदार नहीं दिखी, जितनी हरियाणा में देखने को मिल रही है।

केंद्र सरकार ने क्लासरूम और कारपोरेट के बीच की दूरी को पाटने के लिए योजना संचालित की है। 12 महीने की संरचित इंटर्नशिप, हर महीने पांच हजार रुपये का का स्टाइपेंड और देश की 353 कंपनियों में काम करने का मौका इस योजना के प्रमुख पहलू हैं। यह माडल युवाओं को पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार की वास्तविक समझ देने के लिए तैयार किया गया।

18 से 30 वर्ष आयु वर्ग के 10वीं, 12वीं, आइटीआइ, डिप्लोमा या स्नातक/तकनीकी डिग्रीधारी युवा इसमें शामिल हो सकते हैं। शर्त यह है कि आवेदक किसी पूर्णकालिक नौकरी में न हो। पायलट प्रोजेक्ट के लिए 840 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में प्रारंभिक बजट अनुमान 10 हजार 831 करोड़ रुपये का था, जिसे संशोधित कर 506 करोड़ रुपये किया गया।

पहले राउंड में देशभर में 82 हजार 77 आफर जारी हुए। इन्हें 28 हजार 141 युवाओं ने स्वीकार किया। इसकी राष्ट्रीय स्वीकार्यता दर 34.3 प्रतिशत रही। हरियाणा में 5 हजार 990 आफर जारी हुए, जिनमें एक हजार 293 स्वीकार किए गए। 99 इंटर्नशिप पूरी भी हो चुकी हैं।

पंजाब में 742 आफर के मुकाबले 223 स्वीकार किए गए। यह दर 30.1 प्रतिशत रही, लेकिन केवल 21 इंटर्नशिप पूरी हो सकीं। हिमाचल प्रदेश में 929 आफर में से 177 स्वीकार हुए जो 19.1 प्रतिशत हैं और 43 पूरे हुए हैं।

दूसरे राउंड में हरियाणा ने 1,780 आफर जारी किए, जिनमें 601 स्वीकार हुए यानी 33.8 प्रतिशत की दर रही। पंजाब में दो हजार 255 आफर दिए गए, लेकिन केवल 472 स्वीकार किए गए। स्वीकार्यता दर घटकर 20.9 प्रतिशत रह गई। हिमाचल प्रदेश में 410 आफर के मुकाबले 106 स्वीकार (25.9 प्रतिशत) हुए। राउंड-दो की रिपोर्ट से साफ हो गया कि पंजाब में आफर की संख्या बढ़ने के बावजूद युवाओं की स्वीकार्यता उसी अनुपात में नहीं बढ़ी।

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के पीछे मुख्य उद्देश्य यही है कि युवा पढ़ाई के दौरान ही रोजगार की दुनिया को समझें। वे आफिस कल्चर, टेक्निकल स्किल और इंडस्ट्री की उम्मीदों के बारे में पहले से तैयार हो सकें।

उत्तर भारत के आंकड़े बताते हैं कि हरियाणा ने इस सोच को तेजी से अपनाया है। पंजाब के लिए चुनौती है कि वह आफर को वास्तविक भागीदारी में बदले। हिमाचल क्रमिक सुधार की राह पर है। बहरहाल, डिग्री और नौकरी के बीच बनाए जा रहे पुल पर हरियाणा के युवा आगे बढ़कर कदम रख रहे हैं।
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