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गुरुग्राम में रिश्वत लेने की दोषी इंस्पेक्टर बर्खास्त, ईटीओ की बर्खास्तगी की भी सिफारिश

Chikheang 3 hour(s) ago views 945
  

रिश्वत लेने की दोषी इंस्पेक्टर और ईटीओ रोशनलाल को बर्खास्त करने की सिफारिश। (सांकेतिक तस्वीर)



आदित्य राज, गुरुग्राम। जीएसटी नंबर जारी करने के बदले रिश्वत लेने की दोषी इंस्पेक्टर सुमित्रा गोदारा को आबकारी एवं कराधान आयुक्त विनय प्रताप सिंह ने बर्खास्त कर दिया। मामले में एक अन्य दोषी ईटीओ रोशनलाल को भी बर्खास्त करने के लिए प्रदेश सरकार के पास सिफारिश भेज दी।

इस सख्त कार्रवाई से विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों में हड़कंप मचा है। कई अधिकारी व कर्मचारी रिश्वत के लेने के आरोप का सामना कर रहे हैं। सभी आरोपित जमानत पर बाहर हैं।

पिछले महीने नौ जनवरी को आबकारी एवं कराधान विभाग के ईटीओ रोशनलाल एवं इंस्पेक्टर सुमित्रा गोदारा को रिश्वत लेने के मामले में दोषी ठहराते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनील दीवान की अदालत ने पांच-पांच साल कैद की सजा सुना दी थी। दोनों जेल में बंद हैं। अदालत के फैसले का अध्ययन करने के बाद विभागीय आयुक्त विनय प्रताप सिंह ने इंस्पेक्टर को बर्खास्त कर दिया।

इंस्पेक्टर तक की बर्खास्तगी का अधिकार आयुक्त के पास होता है। ईटीओ को बर्खास्त करने के लिए सिफारिश प्रदेश सरकार के पास भेज दिया। बताया जाता है कि ईटीओ की भी बर्खास्तगी तय है क्यों कि सजा होने के बाद बर्खास्त करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं रह जाता है।
क्या था मामला?

कारोबारी मोहित ने आबकारी एवं कराधान विभाग के फरीदाबाद कार्यालय में जीएसटी नंबर लेने के लिए आवेदन दिया था। आवेदन की फाइल में कुछ कमियां बताते हुए फरीदाबाद में तैनात आबकारी एवं कराधान अधिकारी (ईटीओ) रोशनलाल ने रिजेक्ट कर दिया था। जब दोबारा आवेदन दिया तो उन्हें गुरुग्राम में तैनात आबकारी एवं कराधान निरीक्षक (इंस्पेक्टर) सुमित्रा गोदारा से मिलने के लिए कहा गया।

आरोप है कि मुलाकात करने पर इंस्पेक्टर ने सात लाख रुपये की मांग की। साथ ही एडवांस के रूप में दो लाख रुपये देने को कहा। कारोबारी ने इसकी शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो से कर दी। ब्यूरो की टीम ने जाल बिछाकर नौ मई 2022 को रिश्वत लेते हुए इंस्पेक्टर को गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया।

इसके बाद ईटीओ को भी फरीदाबाद से गिरफ्तार कर लिया। तमाम सबूतों एवं गवाहों के बयान के आधार पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनील दीवान ने दोनों को पांच-पांच साल की कैद व दो-दो लाख लाख रुपये जुर्माने की सजा सुना दी।
छवि सुधारने का होगा प्रयास

मामले से विभाग की हो रही किरकिरी को देखते हुए अब जो भी अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़े जाएंगे उन्हें आगे फील्ड में तैनात नहीं किया जाएगा। विभाग के आयुक्त विनय प्रताप सिंह ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। जो भी रिश्वत लेते हुए पकड़े जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त से सख्त एक्शन लिया जाएगा।

ईटीओ रोशनलाल एवं इंस्पेक्टर सुमित्रा गोदारा मामले से विभाग से लेकर सरकार की छवि प्रभावित हुई है। जिन अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत है, उनके ऊपर सख्त नजर रखी जाएगी। उन्हें पब्लिक डिलिंग से हटाया जाएगा।

अधिकारियों से यह भी कहा गया है कि वे एक ही बार में किसी भी फाइल में कमियां निकालें और ठीक कराने का हरसंभव प्रयास करें। बार-बार यदि कमियां निकाली गईं फिर संबंधित अधिकारी की कार्यशैली की जांच की जाएगी।
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