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सरकार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उसके आसपास की लगभग 700-750 स्लम बस्तियों के विकास के लिए काम करेगी
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय आवासीय और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि किफायती घरों को फंड उपलब्ध कराने के लिए उनका मंत्रालय धर्मार्थ संस्था बनाने के प्रस्ताव पर काम कर रहा है। इन धर्मार्थ संस्थाओं में कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के जरिये फंड का इंतजाम किया जा सकता है।
उन्होंने किफायती घरों को फंड उपलब्ध कराने के लिए बैंक और दूसरे वित्तीय संस्थानों के आगे नहीं आने पर चिंता जताई। नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नारेडको) के कान्क्लवे को संबोधित करते हुए खट्टर ने इस बात का भी संकेत दिया कि रेरा से पहले के समय से रुके हुए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को वित्तपोषण उपलब्ध कराने के लिए डेडिकेटेड फंड बनाया जा सकता है।
प्रमोटर और खरीदार दोनों को होगा फायदा
इस फंड की स्थापना इंडस्ट्री के सुझावों के आधार पर किया जाएगा ताकि प्रमोटर और खरीदार दोनों को इससे फायदा हो। केंद्रीय मंत्री ने यह भी इशारा किया कि सरकार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उसके आसपास की लगभग 700-750 स्लम बस्तियों के विकास के लिए काम करेगी। अगर यह काम हो जाता है तो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उसके आसपास किफायती घरों को बढ़ावा मिलेगा।
नारेडको ने रुके हुए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को मदद पहुंचाने के लिए स्वामीह फंड का आकार बढ़ाने का सुझाव दिया। किफायती घरों के लिए सस्ती जमीन के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऐसा किया जाना संभव नहीं है। हालांकि ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन की उपलब्धता को बढ़ावा देने के लिए क्रास सब्सिडी के जरिये कुछ हल निकाला जा सकता है, बशर्ते इस मुद्दे पर आम सहमति बन जाए।
नारेडको के चेयरमैन निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि सरकार ने यह पक्का करने के लिए बहुत कोशिशें की हैं कि हाउसिंग को भारतीय अर्थव्यवस्था में प्राथमिकता मिले। हालांकि, 2047 तक हाउसिंग सेक्टर का कंट्रीब्यूशन बढ़ाने के लिए अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है।
(न्यूज एजेंसी एएनआई के इनपुट के साथ)
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