जागरण संवाददाता, भागलपुर। किसी व्यक्ति के मनोभाव को पढ़ना हमेशा चुनौती रहा है। अब भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आइटी), भागलपुर, के इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग में शोधकर्ताओं की टीम ने एक कृत्रिम अभियांत्रिकी आधारित ह्यूमन-मशीन इंटरफेस सेंसर विकसित किया है।
यह सेंसर आपकी बॉडी एक्टिविटी के आधार पर यह बता सकेगा कि आपका मूड क्या है, और बिना किसी शारीरिक संपर्क के यह पहचान भी करेगा कि आप अपने साथ कौन-कौन सा सामान ले जा रहे हैं। अगर परियोजना सफल होती है, तो यह सेंसर भविष्य की स्मार्ट तकनीकों में क्रांति ला सकती है और भारत को इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में अग्रसर करेगी।
- “भागलपुर में तैयार हुआ सेंसर, मशीनें अब पढ़ेंगी आपके मूड और सामान”
- “नए सेंसर से मानव-मशीन इंटरफेस में क्रांति, पढ़ेगा आपका मूड”
- “डिजिटल दुनिया में पहला सेंसर जो जान सकेगा आपकी भावनाएँ”
- “ट्रिपल आइटी का नया आविष्कार: बिना छुए समझेगा आपकी हर एक्टिविटी”
- “मशीनें भी समझेंगी आपकी भावनाएँ, भारत में तैयार हुआ स्मार्ट सेंसर”
- “भागलपुर के वैज्ञानिकों ने बनाया ऐसा सेंसर, जो पढ़ेगा आपकी बॉडी एक्टिविटी”
- “स्मार्ट तकनीक में नया कदम: भावनाओं को पहचानने वाला सेंसर”
- भागलपुर: नई सेंसर तकनीक से मशीनें पढ़ेंगी आपके मूड और सामान को भी!
प्रोजेक्ट का नाम: Artificial Engineered Material Based Sensors for Human-Machine Interfacing using Binary Araknida Salticidae Optimization Techniques
सरल भाषा में यह तकनीक जंपिंग स्पाइडर से प्रेरित बायो-ऑप्टिमाइजेशन एल्गोरिदम का उपयोग करती है। सेंसर मशीनों को मानवीय संवेदनाओं के बेहद करीब ला सकते हैं, चाहे वह आटोमोबाइल सुरक्षा, स्मार्ट फैक्ट्री, या डिजिटल स्वास्थ्य उपकरण हों।
- परियोजना का बजट: ₹8.6 लाख।
- यह अनुसंधान सेंसर प्रोटोटाइप, उच्च स्तरीय शोध पत्र और संभावित पेटेंट की दिशा में अग्रसर है।
देश की इंडस्ट्री के लिए बड़ा मौका
मानव-मशीन इंटरफेसिंग में पारंपरिक सेंसरों की सीमाओं को देखते हुए यह नई तकनीक भावनात्मक संवेदनाओं की पहचान करने में सक्षम होगी। यह स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, रोबोटिक्स और आटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में गेम चेंजर साबित हो सकती है।
प्रोजेक्ट की खासियत और शोध टीम
प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर: डॉ. चेतन बारड़े – मेटामटेरियल एब्जॉर्बर और क्रॉस-पोलराइज़र विशेषज्ञ
सह-अन्वेषक: डॉ. प्रकाश रंजन – बाइनरी स्पाइडर आप्टिमाइजेशन एल्गोरिदम और डिजाइन सिमुलेशन विशेषज्ञ
प्रोजेक्ट एसोसिएट: श्वेता कुमारी – सेंसर प्रोटोटाइप, सिमुलेशन और परीक्षण
वीआईपी सुरक्षा और संस्थानों में भी उपयोगी
शोधकर्ता बताते हैं कि यह सेंसर वीआईपी सुरक्षा और महत्वपूर्ण संस्थानों में प्रवेश नियंत्रण में भी मदद करेगा। मेटल डिटेक्टर की तरह, यह सेंसर दूर से ही पता लगा सकेगा कि कोई व्यक्ति आपत्तिजनक सामग्री लेकर तो नहीं जा रहा है।
“यह शोध केवल तकनीक को उन्नत नहीं बना रहा, बल्कि भावनात्मक समझ वाली मशीनों की नींव रख रहा है।“ -
डा. मधुसूदन सिंह, निदेशक, ट्रिपल आइटी |