इलाहाबाद हाई कोर्ट की फाइल फोटो।
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ अपराधिक मामले में शामिल होने मात्र से पासपोर्ट जारी से इन्कार नहीं किया जा सकता बशर्ते कोर्ट से अनुमति ले ली गई हो। इस टिप्पणी के साथ याची एहतेशामुल हक को अदालत से अनुमति लेने तथा पासपोर्ट अधिकारी को उसके दो महीने के भीतर निर्णय लेने का आदेश देते हुए न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थनंदन की खंडपीठ ने याचिका निस्तारित कर दी है।
कहा है कि पवन कुमार राजभर और रहीमुद्दीन के मामलों में दिए गए निर्णयों के अनुरूप कार्यवाही की जाए। कोर्ट ने याची से कहा है कि वह संबंधित अदालत से अनापत्ति प्रमाणपत्र (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) प्राप्त करने के लिए संपर्क करे अथवा उच्च अदालत की उस पीठ से संपर्क करे जिसने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाई है और अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है।
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इसके बाद पासपोर्ट अधिकारी याची को पासपोर्ट जारी करने के संबंध में नया निर्णय लेंगे। पासपोर्ट अधिकारी दो महीने के भीतर उचित आदेश पारित करेंगे। याची के खिलाफ थाना धनघाटा में मारपीट व धमकी देने का मामला दर्ज है। याचिका में पासपोर्ट अधिकारी क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, बसरातपुर- अशोक नगर, एसपी तथा थानाध्यक्ष धनघाटा को प्रतिवादी बनाया गया था। |
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