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अमेरिका-भारत ट्रेड डील: अगले हफ्ते US जाएगी भारतीय अधिकारीयों की टीम, जानें कब समझौता पर लगेगी मुहर?

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भारतीय टीम अगले सप्ताह अमेरिका में मसौदा अंतिम करेगी



राजीव कुमार, नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर दोनों देशों के संयुक्त बयान जारी होने के बाद अब वैधानिक समझौते का मसौदा तैयार होना शुरू हो गया है।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार को बताया कि भारत की तरफ से समझौते के मुख्य पैरोकार अगले सप्ताह अमेरिका जा रहे हैं जहां समझौते के वैधानिक मसौदे को अंतिम रूप देने का काम किया जाएगा।

उसके बाद मार्च में दोनों देश समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। संयुक्त बयान जारी होने के बाद अमेरिका की तरफ से जुर्माने के रूप में लगाए गए 25 प्रतिशत का शुल्क तो समाप्त हो गया है, लेकिन अभी 25 प्रतिशत के पारस्परिक शुल्क में कोई राहत नहीं मिली है।
भारतीय टीम अगले सप्ताह अमेरिका में मसौदा अंतिम करेगी

दोनों देशों के संयुक्त बयान के मुताबिक इस शुल्क को 25 से घटाकर 18 प्रतिशत किया जाना है। भारत के मुख्य वार्ताकार की टीम अमेरिका दौरे पर इस राहत की घोषणा को जल्द लागू करवाने पर भी बात करेगी।

अगर अभी यह दर कम नहीं हो पाई तो मार्च में हस्ताक्षर प्रक्रिया पूरी होने के बाद पारस्परिक शुल्क 18 प्रतिशत हो पाएगा।

भारत भी अमेरिका को शुल्क में किसी भी प्रकार की राहत समझौते पर हस्ताक्षर के बाद ही देने जा रहा है।वाणिज्य मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि अमेरिका के जेनेटिकली मोडिफाइड (जीएम) सोयाबीन या मक्का या अन्य कोई जीएम कृषि आइटम को भारत में आने की इजाजत नहीं दी गई है।

जहां तक का सवाल है तो भारत मुख्य रूप से लंबाई वाले काटन का आयात अमेरिका से करेगा। भारत हर साल 40-50 लाख बेल्स (एक बेल में 170 किलोग्राम) काटन का आयात करता है। यह आयात आस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्राजील जैसे देशों से होता है।
अमेरिकी गारमेंट बाजार खुलने से भारत का निर्यात बढ़ेगा

आस्ट्रेलिया से 25-26 करोड़ डॉलर तो अमेरिका से 20 करोड़ डालर का काटन आयात होता है। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक अमेरिका से काटन आयात करने पर भारतीय किसानों को कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन बदले में अमेरिका जो अपना गारमेंट बाजार भारत के लिए कम शुल्क पर खोलने जा रहा है,

उससे रोजगारपरक गारमेंट इंडस्ट्री का निर्यात काफी बढ़ सकता है। क्योंकि अमेरिका 80 अरब डालर का सिर्फ गारमेंट का आयात करता है और भारत की हिस्सेदारी इसमें 10 प्रतिशत भी नहीं है।

खाद्य तेल का भी भारत पहले से बड़ा आयातक देश है और सोयाबीन तेल भी भारत पहले से आयात कर रहा है। भारत सालाना 50 लाख टन से अधिक का सोयाबीन तेल का आयात करता है। अभी मुख्य रूप से ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे देशों से यह आयात होता है।

अब अमेरिका भी यह आयात कर सकेगा। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार समझौते में किसी भी डिजिटल व्यापार को अभी कोई वार्ता नहीं हुई है। यह व्यापार समझौते से जुड़ा मसौदा जरूर है, लेकिन उस पर मार्च में होने वाले पहले चरण के हस्ताक्षर के बाद कोई भी बातचीत होगी।
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