एआई के कारण चांदनी चौक के कारोबार की प्रकृति बदली।
नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सैकड़ों वर्ष पुराने चांदनी चौक बाजार में परंपरागत कारोबार का तरीका बदल रहा है। लहंगा, साड़ी और समीज-सलवार के साथ ही ज्वेलरी जैसे उत्पादों की डिजाइन तैयार करने, ग्राहकों के सामने उसकी बेहतर प्रस्तुति व इंटरनेट मीडिया में प्रचार-प्रसार में नई तकनीक का भरपूर इस्तेमाल हो रहा है। जिससे कारोबार में नए आयाम खुले हैं, नए ग्राहकों तक पहुंच बनी है।
हफ्तों का काम मिनटों में सिमट गया है। व्यापार में वृद्धि हुई है तो कारोबारी व्यय भी घटा है। खास बात कि यह बदलाव टेक्नोसेवी व्यापारियों की नई पीढ़ी ला रही है, जो इंटरनेट मीडिया के प्रयोग से युवा ग्राहकों तक पहुंच बना रहे हैं। मुगलकालीन चांदनी चौक में लहंगा, साड़ी, समीज-सलवार का थोक बाजार है। वहीं, दरीबा व कूचा महाजनी में ज्वेलरी का थोक काम होता है।
दिल्ली हिंदुस्तानी मर्केंटाइल एसोसिएशन (डीएचएमए) के महासचिव श्रीभगवान बंसल कहते हैं कि एआई ने काम को काफी आसान और सम़ृद्ध किया है। बड़ी बात कि इससे समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है। परिधानाें में नए डिजाइन का प्रवेश हो रहा है। कपड़े तैयार करने में कंपनियां तक एआई का इस्तेमाल कर रंग व डिजाइन तैयार करा रही हैं।
लहंगे की एक दुकान के दुकानदार रक्षित गोयल के अनुसार, एआई के माध्यम से वह भावी दुल्हन की पसंद को तत्काल ही एआइ फोटोज के माध्यम से जान पाते हैं। पसंद के अनुसार, उसमें कमांड देते हैं और विकल्प आ जाते हैं। इसी तरह, कैटलाग तैयार करने में एक फोटोशूट पर ही 50 से 60 हजार रुपये तक का खर्च था। जिसमें मॉडल, मेकअप मैन, कैमरामैन, स्थान समेत अन्य का खर्च था।
इसी तरह, लहंगे व परिधानों को निर्धारित स्थल तक लाने ले जाने की जद्दोजहद थी। जिसे अब एआइ ने न सिर्फ जीरो खर्च पर किया है, बल्कि तत्काल ही सहज बना दिया है। एआइ वीडियो व फोटोज में वह आसानी से कैटलॉग तैयार कर लेते हैं। इसी तरह, इंटरनेट मीडिया पर प्रचार-प्रसार के लिए भी फोटो व वीडियो आसानी से चुटकियों में बन जाते हैं। ऐसा कर उन्होंने अपने कारोबार में 20 प्रतिशत तक की वृद्धि की है।
रक्षित गोयल चांदनी चौक के लहंगा व साड़ी बाजार में अकेले एआई इस्तेमाल करने वाले युवा व्यापारी नहीं है। उनकी संख्या सैकड़ों में है, जिसने नई तकनीक का इस्तेमाल कर अपने कारोबार को बेहतर किया है।
नई डिजाइन में एआई का इस्तेमाल
दरीबा में चौथी पीढ़ी के ज्वेलरी दुकानदार आशुतोष वर्मा कहते हैं कि न सिर्फ ज्वेलरी की नई डिजाइन तैयार करने में वह एआइ का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसमें परंपरागत और आधुनिक के साथ विश्व भर की ज्वेलरी का फ्यूजन तैयार कर लेते हैं। ग्राहकों को वह माडल दिखाते हैं। अगर ज्वेलरी की डिजाइन या उसमें लगे पत्थर का कलर पसंद नहीं आया तो वह भी एआई से तत्काल बदल लेते हैं। उन्होंने वर्चुअली डिजाइन के साथ खरीदार की फोटो लेकर वह सेट पहनाकर दिखाते हैं।
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