search

18 सालों में हुई सिर्फ एक गवाही, भाजपा नेता समेत पांच बरी; दुष्कर्म के अपराध के विरोध में छात्रों ने किया था प्रदर्शन

deltin33 3 hour(s) ago views 615
  

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण



जागरण संवाददाता, देहरादून। आईएसबीटी तिराहे पर करीब 18 साल पहले बलवा, चक्का जाम और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में अदालत ने मंगलवार को भाजपा के मौजूदा प्रदेश मंत्री आदित्य चौहान समेत पांच आरोपियों को बरी कर दिया है। ये सभी उस दौरान छात्र नेता थे।

मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि अदालत से दो बार मौका देने के बावजूद अभियोजन पक्ष एक मात्र गवाह (तत्कालीन दारोगा सुशील कुमार) पेश कर सका। उन्होंने भी जिरह में कह दिया कि उन्हें घटना की कोई सूचना नहीं मिली थी। वह किसी अभियुक्त को नहीं पहचानते। वह तो उच्चाधिकारियों के कहने पर गए थे। इसके अलावा उन्हें कुछ नहीं पता।

तृतीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट साहिस्ता बानो ने फैसले में कहा है कि पर्याप्त मौके देने के बावजूद अभियोजन पक्ष एक मात्र गवाह पेश कर पाया। अभियोजन आरोपियों के खिलाफ अपराध को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। इस मामले में भाजपा के प्रदेश मंत्री आदित्य के अलावा पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष जितेंद्र रावत, कांग्रेस नेता ओम प्रकाश सती, डीएवी के पूर्व छात्र संघ महासचिव सुशील नौटियाल और एक अन्य आरोपी जितेंद्र कुमार को दोषमुक्त किया है।  

अभियोजन के अनुसार, यह घटना 25 जुलाई 2008 की रात करीब नौ बजे हुई थी। तत्कालीन एसएसआई दिनेश चंद्र बौठियाल को सूचना मिली थी कि 60-70 लड़कों की भीड़ ने आईएसबीटी तिराहे पर जाम लगाकर तोड़फोड़ शुरू कर दी है। ये युवक थाना डालनवाला में दर्ज एक दुष्कर्म के मामले के विरोध में लाठी-डंडों से लैस होकर प्रदर्शन कर रहे थे। आरोप था कि प्रदर्शनकारियों ने उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बस के शीशे भी तोड़ दिए और यात्रियों में दहशत पैदा की।

यह भी पढ़ें- CM धामी ने भाजपा पदाधिकारियों से किया संवाद, कहा-सुशासन और विकास के लिए सशक्त समन्वय आवश्यक

इस तरह बिखरी अभियोजन की कहानी
पुलिस ने आरोप पत्र में कुल आठ गवाह बनाए थे, लेकिन 18 साल के लंबे इंतजार के बाद भी केवल एक गवाह को ही अदालत में पेश किया जा सका। अदालत ने गवाही के इंतजार में 27 जून 2025 को गवाही का अवसर समाप्त कर दिया, लेकिन अभियोजन की अर्जी पर जनवरी 2026 में पुन: दो तारीखों पर बाकी गवाह पेश करने का अवसर दिया, लेकिन अभियोजन पक्ष फिर नाकाम रहा। जिस बस में तोड़फोड़ का दावा किया गया था, उसके ड्राइवर या कंडक्टर की गवाही भी नहीं हुई। आखिरकार अदालत ने आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया।

एक आरोपी ने 2017 में ही जुर्म स्वीकार लिया था
इस मामले में अपर राजीव नगर निवासी अमित जोशी छठा आरोपी था, जिसने मार्च 2017 को ही अपना जुर्म स्वीकार कर लिया था। अदालत ने उसे तब अर्थदंड की सजा सुना दी थी, हालांकि बाकी आरोपियों ने खुद को बेकसूर बताया था, जिस पर सुनवाई चलती रही, लेकिन सालों इंतजार के बाद भी बाकी गवाह पेश नहीं हुए।
like (0)
deltin33administrator

Post a reply

loginto write comments
deltin33

He hasn't introduced himself yet.

1510K

Threads

0

Posts

4710K

Credits

administrator

Credits
472878