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निजीकरण के मुद्दे पर यूपी विधान परिषद में हंगामा, सपा का बहिर्गमन; श्रम मंत्री ने विपक्ष के आरोपों को बताया बेबुनियाद

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राज्य ब्यूरो, लखनऊ। विधान परिषद में निजीकरण के मुद्दे को लेकर विपक्ष ने सत्ता पक्ष को घेरा। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव, आशुतोष सिन्हा व डॉ. मानसिंह यादव सहित सपा के अन्य सदस्यों ने आरोप लगाया कि युवाओं को स्थायी रोजगार देने का वादा कर सरकार निजीकरण की नीति लागू कर रही है।

हकीकत यह है कि न तो युवाओं को रोजगार मिल रहा है और न ही आर्थिक सुरक्षा। निजीकरण के बाद सरकारी व सार्वजनिक क्षेत्र में नियमित भर्तियां घट रही हैं। नियमित पद समाप्त हो रहे हैं। श्रम मंत्री अनिल राजभर ने विपक्ष ने आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने पिछले करीब नौं वर्षों में दी गई नौकरियों का आंकड़े पेश करते हुए कहा कि हमारी सरकार ने सबसे ज्यादा नौकरियां दी हैं। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सदन को गुमराह कर रहा है। इस दोनों पक्षों में जमकर बहस हुई और सपा के सदस्यों ने सदन का बहिर्गमन किया।

विधान परिषद में बुधवार को कुंवर मानवेन्द्र सिंह के सभापतित्व में शुरू हुई सदन की कार्यवाही में विपक्ष ने बिजली के निजीकरण के मुद्दे को लेकर भी सरकार को घेरा। कहा कि बिजली विभाग की अरबों-खरबों रुपये की सरकारी संपत्तियों का आज तक कोई मूल्यांकन नहीं किया गया। सरकार बिजली का निजीकरण कर इन संपत्ति को पूंजीपतियों को कौड़ियों के दाम पर बेचने की तैयारी कर रही है।  

भाजपा के देवेन्द्र प्रताप सिंह ने प्रश्न किया कि महोबा में पहली जनवरी से वाहनों की फिटनेस का कार्य बंद कर दिया गया है। क्या हर जिले में तीन-तीन वाहन फिटनेस स्टेशन खोले जाने हैं। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने स्पष्ट किया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के निर्देश पर स्वचलित वाहन परीक्षण स्टेशन (एटीएस) खोले जाने हैं। वाहनों की फिटनेस के लिए महोबा को झांसी से संबद्ध किया गया है। उन्होंने बताया कि हर जिले में अधिकतम तीन स्वचलित परीक्षण स्टेशन खोलने की अनुमति है। सभापति ने कहा कि जब तक सभी जिलों में एटीएस नहीं स्थापित हो जाते पुरानी व्यवस्था लागू रखी जाए।

वहीं शिक्षक दल (गैर राजनीतिक) के ध्रुप कुमार त्रिपाठी ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के गठन के बाद शिक्षकों की सेवाशर्तों संबंधी धारा 21 व 18 के समाप्त होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आयोग अधिनियम की धारा 11 (छ) में व्यवस्था की गई है कि यदि प्रबंध तंत्र या नियुक्ति अधिकारी शिक्षकों को नियुक्ति पत्र जारी करने में विफल रहता है तो संबंधित पद समाप्त कर दिया जाएगा।

यह धारा विद्यालयों के अस्तित्व के लिए घातक है। निर्दलीय सदस्य डा. आकाश अग्रवाल ने आगरा में यातायात व्यवस्था का मुद्दा उठाया। नेता सदन केशव मौर्य ने कहा कि आगरा कीयातायात व्यवस्था मेट्रो व अन्य विकास कार्यों की वजह से प्रभावित है। इसे और व्यवस्थित कराया जाएगा।

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