कंसर्ट की भीड़ से लेकर तेल कुओं तक क्या इंसान भी ला सकते हैं भूकंप (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भूकंप आमतौर पर धरती के अंदर मौजूद फॉल्ट लाइनों (दरारों) में होने वाली प्राकृतिक हलचल से आते हैं। लेकिन कुछ खास परिस्थितियों में इंसानी गतिविधियां भी जमीन में कंपन पैदा कर सकती हैं। वैज्ञानिक प्राकृतिक टेक्टोनिक भूकंप और इंसानों द्वारा उत्पन्न कंपन (इंड्यूस्ड भूकंप) के बीच फर्क करते हैं।
खनन, बड़े जलाशयों को भरना या जमीन के अंदर तरल पदार्थ इंजेक्ट करना जैसी गतिविधियां छोटे भूकंपीय झटके पैदा कर सकती हैं। ज्यादातर ऐसे झटके बहुत हल्के होते हैं और किसी तरह का नुकसान नहीं करते। हालांकि कुछ इलाकों में औद्योगिक गतिविधियों से अपेक्षाकृत तेज झटके भी दर्ज किए गए हैं।
पिछले कुछ वर्षों में वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि ऐसे भूकंप क्यों और कैसे आते हैं, और क्या इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है। सवाल यह नहीं है कि इंसान जमीन को हिला सकते हैं या नहीं, बल्कि यह है कि यह कितना बड़ा असर डाल सकता है और इसे कितना नियंत्रित किया जा सकता है।
भीड़ भी पैदा कर सकती है हल्का कंपन
अमेरिका के सिएटल शहर में एक कंसर्ट के दौरान पॉप स्टार टेलर स्विफ्ट के शो में हजारों प्रशंसकों के एक साथ कूदने-नाचने से जमीन में कंपन दर्ज हुआ। यह कंपन करीब 2.3 तीव्रता के भूकंप जैसा माना गया।
ऐसी जानकारी द वाशिंगटन पोस्ट में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दी गई थी। वैज्ञानिकों के अनुसार जब बड़ी संख्या में लोग एक साथ उछलते हैं तो उनकी ऊर्जा जमीन में तरंगों के रूप में फैलती है।
हालांकि 2.3 तीव्रता का झटका बहुत छोटा माना जाता है। इसे केवल आसपास ही महसूस किया जा सकता है और इससे किसी तरह का नुकसान नहीं होता। यह कंपन अस्थायी होता है और इसमें धरती की गहरी फॉल्ट लाइनें शामिल नहीं होतीं।
जमीन के नीचे तरल इंजेक्शन से असली भूकंप
ज्यादा गंभीर मामले तेल और गैस उद्योग से जुड़े पाए गए हैं। मैसाचुसेट्स की तकनीकी संस्था के वैज्ञानिकों ने इटली के एक तेल क्षेत्र का अध्ययन किया। तेल कंपनियां जब अपशिष्ट पानी को जमीन के बहुत नीचे इंजेक्ट करती हैं, तो वहां दबाव बढ़ता है।
अगर यह दबाव पहले से मौजूद फॉल्ट लाइन पर असर डालता है, तो चट्टानें खिसक सकती हैं और ऊर्जा निकलने से भूकंप आ सकता है। ऐसे मामले अमेरिका के कुछ हिस्सों और दक्षिणी इटली में देखे गए हैं, जहां ज्यादा मात्रा में इंजेक्शन के बाद भूकंपों की संख्या बढ़ी।
इंजेक्शन की गति घटाने से कम हुए झटके
अध्ययन में पाया गया कि जब रोजाना इंजेक्शन की मात्रा कम की गई, तो भूकंपों की संख्या भी घट गई। पहले जहां सैकड़ों छोटे झटके दर्ज हो रहे थे, वहीं दर घटाने के बाद बहुत कम और हल्के झटके आए।
कंप्यूटर मॉडल और भूगर्भीय आंकड़ों की मदद से वैज्ञानिकों ने यह समझा कि दबाव को धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से बढ़ाना जोखिम कम कर सकता है। इससे संकेत मिलता है कि मानव-जनित भूकंपों को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है, बशर्ते निगरानी और योजना सावधानी से की जाए।
रोकथाम भूगोल और योजना पर निर्भर
प्राकृतिक भूकंपों को रोका नहीं जा सकता, क्योंकि वे धरती की परतों में वर्षों से जमा हो रहे दबाव के कारण आते हैं। लेकिन मानव-जनित झटकों को कम किया जा सकता है, अगर औद्योगिक परियोजनाएं स्थानीय भूगोल को ध्यान में रखकर चलाई जाएं और जमीन के नीचे दबाव में बदलाव को सावधानी से नियंत्रित किया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि पूरी तरह काम बंद करना ही एकमात्र उपाय नहीं है। सही डेटा, सावधानीपूर्वक योजना और लगातार निगरानी से जोखिम कम किया जा सकता है। जमीन हिल सकती है, लेकिन शायद कम बार।
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