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मोबाइल पर शादी के कार्ड की APK फाइल खोलते ही खाते से उड़ गए ₹1.19 लाख, हाथरस की महिला बनी शिकार

cy520520 1 hour(s) ago views 468
  

प्रतीकात्मक तस्वीर



संवाद सत्र, जागरण हाथरस। साइबर ठग ने उद्यान विभाग की महिला कर्मचारी को शादी के कार्ड की एपीके फाइल भेजकर एक लाख नौ हजार 19 रुपये की ठगी करने के मामले में साइबर क्राइम थाने पर शिकायत है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

कोतवाली हाथरस गेट क्षेत्र की कन्हा विहार कॉलोनी निवासी नूतन रानी पत्नी शीतल शर्मा उद्यान विभाग में बाबू के पद पर तैनात हैं। उन्होंने बताया कि उसका पंजाब नेशनल बैंक शाखा में खाता है। वह अपने खाते में फोन पे से लेनदेन करती है। उसके फोन पर व्हाटसएप मेसेज आया था, जिसमें शादी के कार्ड की एपीके फाइल थी, उसे जैसे ही क्लिक किया तो उसका फोन हैक हो गया।

फोन-पे पर बैलेंस चेक किया तो खाते में धनराशि कम मिली। उसने बैंक शाखा से संपर्क किया तो उन्हें बताया गया कि उनके खाते से एक लाख नौ हजार 19 हजार रुपये धोखाधड़ी से निकाले गए। वह पंजाब नेशनल बैंक पहुंचीं।यहां पर उन्होंने खाते से अज्ञात व्यक्ति द्वारा पर किए गए रुपयों की जानकारी दी।

उनके खाते से दो बार में 49-49 हजार रुपये और तीसरी बार में 20 हजार रुपये पार हुए हैं। इधर, साइबर ठगों द्वारा व्हाट्सएप पर शादी के निमंत्रण वाली फाइल भेजी जाती है। एक बार क्लिक करने पर एपीके फाइल फोन में डाउनलोड हो जाती है, जिसके बाद साइबर अपराधी पीड़ित की गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं।

वे फोन में मौजूद डेटा का इस्तेमाल करके फोन के मालिक होने का नाटक करते हैं और लोगों से पैसे मांगकर आगे धोखाधड़ी कर सकते हैं। साइबर पुलिस ने पिछले साल चेतावनी जारी की थी, जिसमें लोगों को सलाह दी गई कि वे सतर्क रहें और अज्ञात स्रोतों से प्राप्त फाइलों को डाउनलोड न करें।

एक मोबाइल हैक, फिर आगे बढ़ता है सिलसिला

साइबर क्राइम के प्रभारी ने बताया कि आमतौर पर साइबर अपराधी किसी व्यक्ति का मोबाइल हैक करते हैं और साइबर ठगी की वारदात को अंजाम देते हैं। इसके साथ ही उस मोबाइल में जीतने भी कॉन्टैक्ट नंबर हैं। उन पर भी संदिग्ध लिंक अपने आप फारवर्ड हो जाता है।

इस तरह यह सिलसिला आगे बढ़ता रहता है। इसके अलावा शेयर बाजार में निवेश और आकर्षक रिटर्न का झांसा देकर, पेंशनधारकों को सत्यापन के नाम पर भी ठगी की वारदातों को अंजाम दिया जा रहा है।

कॉल और ओटीपी भी पहुंचते ठगों तक

उन्होंने बताया कि आज के दौर में हर व्यक्ति के पास एंड्रायड मोबाइल है, जिसमें कई निजी जानकारियां और डाटा होता है। साइबर ठग वाट्सएप या अन्य इंटरनेट मीडिया एप के जरिए एक एपीके फाइल भेजते हैं। जिस पर क्लिक करते ही मोबाइल हैंग हो जाता है।

इन फाइलों में एक प्रकार का वायरस होता है, जो मोबाइल को हैक करके उसका एक्सेस साइबर ठगों तक पहुंचा देता है। मोबाइल पर आने वाला ओटीपी भी साइबर ठगों तक पहुंच जाता है। इसके बाद वे बैंक खाते से रकम ट्रांसफर कर धोखाधड़ी की वारदातों को अंजाम देते हैं।
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