search

बिहार में माओवाद पर एसटीएफ का शिकंजा, 150 से अधिक गिरफ्तार; इनामी नक्सलियों का आत्मसमर्पण

cy520520 5 hour(s) ago views 78
  

नक्सलियों के सरेंडर से बिहार में माओवाद की टूटी कमर



राज्य ब्यूरो, पटना। राज्य को माओवादियों से मुक्त करने को लेकर बिहार पुलिस की एसटीएफ लगातार विशेष अभियान में जुटी थी। विगत एक साल में माओवादियों के विरुद्ध कार्रवाई तीन गुना तक बढ़ी है। वर्ष 2024 में जहां 44 माओवादी गिरफ्तार किए गए थे, वहीं वर्ष 2025 में 134 माओवादी गिरफ्तार किए गए। इसके बाद फरवरी तक करीब दो दर्जन माओवादी और पकड़े गए हैं।

पुलिस मुख्यालय ने उत्तर बिहार को पहले ही नक्सलमुक्त घोषित कर दिया था। माओवादी जमुई, लखीसराय, मुंगेर के अलावा झारखंड से सटे जिलों तक सिमट कर रह गए थे। इन्हीं इलाकों में एसटीएफ का मुख्य फोकस भी रहा।

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, पिछले एक साल में 150 से अधिक माओवादी गिरफ्तार किए गए हैं। सुरेश कोड़ा से पहले भी आधा दर्जन इनामी माओवादियों ने आत्मसमर्पण भी किया है।
दिसंबर में तीन कुख्यात माओवादियों ने किया था आत्मसमर्पण

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, मुंगेर का पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र माओवाद से लंबे समय तक प्रभावित रहा है। यहां एसटीएफ ने अर्द्धसैनिक बलों की मदद से अभियान चलाया। पिछले साल 28 दिसंबर, 2025 को तीन माआवोदी कमांडर बहादुर कोड़ा, नारायण कोड़ा और बिनोद कोड़ा ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था।  

नारायण कोड़ और बहादुर कोड़ा ने दो इंसास राइफल, चार एसएलआर राइफल के साथ 500 राउंड गोली और दस वॉकी-टॉकी भी समर्पित किया था। इससे पहले जुलाई, 2025 में अतिसक्रिय नक्सली दस्ता के सदस्य भोला कोड़ा उर्फ विकास उर्फ रोहित कोड़ा ने मुंगेर में आत्मसमर्पण किया था।
मुठभेड़ में मारे गए थे तीन कुख्यात माओवादी

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, मुंगेर में लगातार चल रहे अभियान से प्रभावित होकर माओवादी दस्ते ने कहीं और शरण ली। इसके परिणामस्वरूप झारखंड के विभिन्न इलाकों में मुठभेड़ हुई जिसमें प्रवेश दा उर्फ सहदेव सोरेन, अरविंद यादव उर्फ आलोक जी उर्फ नेता जी और टुन्नी लाल उर्फ टुनटुन के साथ अन्य माओवादियों को ढेर किया गया।
like (0)
cy520520Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
cy520520

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1610K

Credits

Forum Veteran

Credits
160032