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इधर ट्रंप की धमकी, उधर ईरान ने कर ली फुल तैयारी, न्यूक्लियर साइटों पर बढ़ी सुरक्षा; सैटेलाइट तस्वीरों से खुला राज

LHC0088 3 hour(s) ago views 89
  

इधर ट्रंप ने दी धमकी, उधर ईरान ने भी तैयारी की तेज (फोटो सोर्स- रॉयटर्स)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान अपने परमाणु और मिसाइल ठिकानों को मजबूत करने में लगा है। हाल की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि ईरान ने एक संवेदनशील सैन्य परिसर में नई इमारत के ऊपर कंक्रीट की ढाल बना दी है और उसे मिट्टी से ढक दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह जगह 2024 में इजराइल के हमले का निशाना बनी थी। तस्वीरों में यह भी दिखा है कि ईरान ने एक परमाणु स्थल पर सुरंगों के प्रवेश द्वारों को मिट्टी से भर दिया है। इसके अलावा एक अन्य परिसर में सुरंगों के मुहानों को और मजबूत किया गया है तथा पिछले संघर्ष में क्षतिग्रस्त हुए मिसाइल अड्डों की मरम्मत भी की गई है।

ये गतिविधियां ऐसे समय में सामने आई हैं जब वॉशिंगटन, तेहरान के साथ परमाणु समझौते पर बातचीत की कोशिश कर रहा है, लेकिन बातचीत विफल होने पर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दे चुका है।

  
पारचिन सैन्य परिसर में नया निर्माण

तेहरान से करीब 30 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित पारचिन मिलिट्री कॉम्प्लेक्स ईरान का बेहद संवेदनशील सैन्य ठिकाना है। पश्चिमी खुफिया एजेंसियों का दावा है कि दो दशक पहले यहां परमाणु बम से जुड़े परीक्षण हुए थे, हालांकि ईरान हमेशा परमाणु हथियार बनाने से इनकार करता रहा है। अक्टूबर 2024 में इजराइल ने इस परिसर पर हमला किया था।

हमले से पहले और बाद की तस्वीरों में एक आयताकार इमारत को भारी नुकसान दिखा। 6 नवंबर 2024 की तस्वीरों में वहां दोबारा निर्माण के संकेत मिले। 12 अक्टूबर 2025 की तस्वीरों में नई संरचना का ढांचा और उसके पास दो छोटी इमारतें दिखाई दीं। 14 नवंबर तक बड़ी इमारत पर धातु की छत दिखी, लेकिन 13 दिसंबर की तस्वीरों में यह ढांचा आंशिक रूप से ढका नजर आया।

16 फरवरी की तस्वीरों में यह संरचना पूरी तरह छिपी दिखी। इंस्टिट्यूट फोर साइंस एंड इंटरनेशनल सीक्योरिटी (ISIS) ने 22 जनवरी की अपनी रिपोर्ट में बताया कि यहां \“कंक्रीट सरकोफेगस\“ यानी कंक्रीट की ढाल बनाई जा रही है।

आईएसआईएस के अनुसार इमारत के अंदर लगभग 36 मीटर लंबा और 12 मीटर चौड़ा बेलनाकार चैम्बर दिखा, जो उच्च विस्फोटक परीक्षण से जुड़ा हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी संरचनाएं परमाणु हथियार विकास में अहम होती हैं, हालांकि इनका उपयोग पारंपरिक हथियारों में भी हो सकता है।
इस्फहान और नतांज के पास सुरंगों की सुरक्षा बढ़ी

इस्फहान न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स उन तीन यूरेनियम संवर्धन संयंत्रों में से एक है, जिन्हें जून में अमेरिका ने निशाना बनाया था। यहां परमाणु ईंधन चक्र से जुड़ी सुविधाओं के अलावा एक भूमिगत क्षेत्र भी है, जहां राजनयिकों के अनुसार ईरान का संवर्धित यूरेनियम रखा जाता रहा है।

जनवरी के अंत में ली गई तस्वीरों में दो सुरंगों के प्रवेश द्वारों को मिट्टी से भरते हुए देखा गया। 9 फरवरी तक तीसरे प्रवेश द्वार को भी बंद कर दिया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे किसी हवाई हमले का असर कम किया जा सकता है और जमीनी कार्रवाई भी मुश्किल हो जाती है।

  

नतांज के पास पहाड़ के नीचे बने एक अन्य सुरंग परिसर के दो प्रवेश द्वारों को भी फरवरी से मजबूत किया जा रहा है। आईएसआईएस ने बताया कि वहां डंप ट्रक, सीमेंट मिक्सर और भारी मशीनों की आवाजाही देखी गई। इस जगह को \“पिकैक्स माउंटेन\“ कहा जाता है, लेकिन इसके वास्तविक उद्देश्य स्पष्ट नहीं हैं।
शिराज और कोम मिसाइल अड्डों की मरम्मत

दक्षिणी ईरान में शिराज से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित शिराज साउथ मिसाइल बेस, 25 प्रमुख अड्डों में से एक है जहां से मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागी जा सकती हैं। अलमा रिसर्च एंड एजुकेशन सेंटर के अनुसार, पिछले साल के संघर्ष में इस अड्डे को हल्का नुकसान हुआ था।

3 जुलाई 2025 और 30 जनवरी की तस्वीरों की तुलना में यहां मरम्मत और सफाई का काम दिखा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह अड्डा अभी भी पूरी तरह अपनी पुरानी क्षमता में नहीं लौटा है।

वहीं कोम शहर से करीब 40 किलोमीटर उत्तर स्थित कोम मिसाइल बेस को मध्यम स्तर का नुकसान हुआ था। 16 जुलाई 2025 और 1 फरवरी की तस्वीरों में एक क्षतिग्रस्त इमारत पर नई छत दिखाई दी। मरम्मत का काम 17 नवंबर के आसपास शुरू हुआ और करीब 10 दिन में पूरा हो गया।

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