ट्रंप के टैरिफ के बावजूद अमेरिका का व्यापार घाटा 901 अरब डॉलर से अधिक, नीति की सफलता पर खड़े हुए सवाल
नई दिल्ली| अमेरिका में टैरिफ (Trump Tariffs) की सख्ती के बावजूद व्यापार घाटा 2025 में 901 अरब डॉलर से ऊपर बना रहा, जिससे ट्रंप की नीति पर सवाल खड़े हो गए हैं।
अमेरिकी वाणिज्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में अमेरिका का कुल व्यापार घाटा घटकर 901 अरब डॉलर के थोड़ा ऊपर रहा, जबकि 2024 में यह 904 अरब डॉलर था। यानी मामूली गिरावट जरूर आई, लेकिन घाटा अब भी बेहद बड़ा है।
राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने 2025 में ज्यादातर देशों से आयात पर दो अंकों वाले टैरिफ लगाए थे। मकसद था आयात कम करना और घरेलू उद्योग को बढ़ावा देना। इसके बावजूद तस्वीर पूरी तरह नहीं बदली।
ताइवान से बढ़ाया चिप-टेक्नोलॉजी आयात
पिछले साल अमेरिका का निर्यात 6% बढ़ा, जबकि आयात में लगभग 5% की बढ़ोतरी हुई। लेकिन मशीनरी और एयरक्राफ्ट जैसे सामानों के व्यापार में घाटा 2% बढ़कर 1.24 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया। खास तौर पर अमेरिकी कंपनियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस निवेश को सपोर्ट करने के लिए ताइवान से कंप्यूटर चिप और टेक्नोलॉजी आयात बढ़ाया।
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चीन के आयात-निर्यात दोनों में आई कमी
चीन के साथ व्यापार घाटा जरूर 32% घटकर 202 अरब डॉलर रह गया। यह कमी चीन को होने वाले निर्यात और आयात दोनों में गिरावट से आई। लेकिन व्यापार पूरी तरह कम नहीं हुआ, बल्कि चीन से हटकर दूसरे देशों की तरफ मुड़ गया।
ताइवान के साथ व्यापार घाटा दोगुना होकर 147 अरब डॉलर और वियतनाम के साथ 44% बढ़कर 178 अरब डॉलर हो गया।
मेक्सिको के साथ व्यापार घाटा बढ़कर 197 अरब डॉलर पहुंच गया, जो 2024 में 172 अरब डॉलर था।
वहीं कनाडा के साथ घाटा 26% घटकर 46 अरब डॉलर रह गया। सेवाओं- जैसे बैंकिंग और टूरिज्म के क्षेत्र में अमेरिका को 339 अरब डॉलर का सरप्लस मिला, जो 2024 के 312 अरब डॉलर से ज्यादा है।
साल की शुरुआत में कंपनियों ने टैरिफ लागू होने से पहले ज्यादा आयात किया, जिससे जनवरी-मार्च में घाटा बढ़ा, बाद में यह कुछ कम हुआ।
अमेरिकी आयातक करते हैं टैरिफ का भुगतान
ध्यान देने वाली बात यह है कि टैरिफ का भुगतान अमेरिकी आयातक करते हैं और अक्सर यह बोझ ग्राहकों पर महंगाई के रूप में डाला जाता है। हालांकि अर्थशास्त्रियों के अनुमान के मुकाबले इसका असर महंगाई पर कम रहा।
ट्रंप का तर्क है कि टैरिफ से अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग मजबूत होगी और सरकारी खजाने में ज्यादा पैसा आएगा, लेकिन आंकड़े बता रहे हैं कि टैरिफ का दांव पूरी तरह सफल नहीं दिख रहा। |