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आजादी के दशकों बाद भी कंधों पर जिंदगी: उत्तराखंड में बीमार महिला को 10 किमी डोली में लाए अस्पताल

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पिथौरागढ़ में बीमार महिला को डोली से सड़क तक लाते ग्रामीण।



संवाद सूत्र, मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से लगे संवेदनशील मुनस्यारी विकासखंड में ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस कड़ा संघर्ष कर रहे हैं।

आजादी के दशकों बाद भी क्षेत्र के कई गांव सड़क से वंचित हैँ। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. नरी राम के गांव गांधी नगर की बदहाली इसका जीता जागता प्रमाण है, जहां सड़क न होने के कारण एक बीमार महिला को डोली के सहारे 10 किलोमीटर पैदल चलकर अस्पताल पहुंचाना पड़ा।

गुरुवार को गांधी नगर निवासी सरूली देवी 50 वर्ष पेट में अचानक तेज दर्द उठा। गांव तक मोटर मार्ग न होने के कारण एंबुलेंस या किसी अन्य वाहन का पहुंचना संभव नहीं था।  

ऐसे में गांव के युवाओं ने आनन फानन में डोली तैयार की और बीमार महिला को कंधों पर उठाकर लगभग दस किलोमीटर के दुर्गम पैदल मार्ग से मदकोट स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।जहां से फिर वाहन जिला अस्पताल भेजा गया।

सीमांत में आज भी बीमार और जरूरतमंद लोगों के लिए ग्रामीणों के कंधे ही सबसे बड़ा सहारा बने हुए हैं। मुनस्यारी क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां अब तक मोटर मार्ग की सुविधा नहीं पहुंच पाई है।


ग्राम पंचायत में आज तक स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। ग्रामीण आज भी आदिम युग जैसा जीवन जीने को मजबूर हैं। प्रशासन को शीघ्र मोटर मार्ग और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए।

तारा विश्वकर्मा ग्राम प्रधान, जोशा गांधी नगर

सीमांत क्षेत्र होने के बावजूद यहां बुनियादी सुविधाओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। सड़क न होने से आपात स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी बीमारों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को उठानी पड़ती है।
राजेश रोशन पूर्व ग्राम प्रधान
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