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RSS के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य मनमोहन वैद्य बोले- देश को उन्नत बनाना है लेकिन उसकी आत्मा नहीं बदलनी चाहिए

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प्रयागराज के गंगानाथ झा केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में तरुणी विद्यार्थी संवाद में अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य मनमोहन वैद्य व अन्य। जागरण



जागरण संवाददाता, प्रयागराज। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) की स्थापना के शताब्दी वर्ष में संघ विस्तार के साथ राष्ट्र के नवनिर्माण अभियान को बल दे रहा है। अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य व पदाधिकारी प्रवास और संवाद कर रहे हैं। विशेष रूप से युवाओं और प्रबुद्ध वर्ग को वैचारिक रूप से जागृत करने का प्रयास है।

गुरुवार को संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य मनमोहन वैद्य संगम नगरी के एक दिवसीय प्रवास पर आए। उन्होंने छात्राओं के साथ संवाद किया। टाइम मैनेजमेंट के साथ टास्क मैनेजमेंट सीखने के लिए प्रेरित किया। उन्नत भारत बनाने के लिए योगदान का आह्वान करते हुए घर के सफल होने के लिए घर की महिला का सफल होना अनिवार्य बताया। जीवन में वैचारिक बदलाव का आग्रह किया।

गंगानाथ झा केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में तरुणी विद्यार्थी संवाद में अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य मनमोहन वैद्य ने कहा, देश को उन्नत बनाना है लेकिन उसकी आत्मा नहीं बदलनी चाहिए। इसके लिए हमें आज कार्य करना होगा तभी आने वाली पीढ़ी को श्रेष्ठ भारत दे सकेंगे। यह हम सब की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि भारत को जानने के तीन प्रकार हैं। पढ़कर, देखकर, सुनकर। छात्राओं से संवाद में भगिनी निवेदिता का उदाहरण देते हुए कहा, उनका मूल नाम मार्गरेट एलिजाबेथ नोबल था। आयरिश महिला थीं लेकिन भारत के उत्थान के लिए कार्य किया। क्या हम भारतीय होकर अपने लिए नहीं प्रयास कर सकते? हमारा दायित्व और बड़ा है। भारत को मानो, भारत को जानो और भारत के बनो। बोले कि इंडिया नहीं भारत हमारी पहचान होनी चाहिए। हम सब को बर्थडे नहीं मनाना। जन्मतिथि वह भी भारतीय पंचांग के अनुसार मनाएंगे तो आमूल चूल परिवर्तन होगा।

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र, गंगानाथ झा परिसर व राजेन्द्र सिंह (रज्जू भइया) स्मृति सेवा न्यास के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस आयोजन में नागपुर से आए न्यूक्लियर रसायन के मर्मज्ञ व पूर्व सह सर कार्यवाह ने अपनी पुस्तक वी एंड द वर्ड अराउंड के संदर्भ में विमर्श को आगे बढ़ाया। समय प्रबंधन, समाज को जोड़ने के प्रयासों को और बढ़ाने की प्रेरणा दी। सीखने की प्रवृत्ति को शिक्षा से अलग व सतत प्रक्रिया बताया। भारतीयता की पहचान को प्रबल बनाए रखने को कहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता परिसर के निदेशक प्रो. ललित कुमार त्रिपाठी ने की। संयोजन परिसर के सहनिदेशक प्रो. देवदत्त सरोदे ने किया। तरुणी विद्यार्थी संवाद के बाद शिक्षक संवाद भी हुआ। विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के शिक्षक शामिल हुए। इस दौरान प्रांत सह कार्यवाह रास बिहारी, प्रो. रामकृष्ण परमहंस, डा. सुरेश पांडेय, डा. श्यामसुंदर पांडेय, राजेशकांत तिवारी आदि मौजूद रहे।

अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य के संवाद कार्यक्रम में एक छात्रा ने पूछा- आप के सपनों का भारत कैसा है? इस पर उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर के बांग्ला गीत को गुनगुनाते हुए कहा- धनो धान्य पुष्पो भरा, आमदेर एई वसुंधरा। ताते आछे आबाक शुभी, ऐमन देशटी कोथाओ खूंजे पाबे नाको तुमी। ओ देश आमर, देशटी ना, ओई जे धान्य-पुष्पो भरा। इस दौरान अधिकारों से आगे बढ़कर कर्तव्यों की प्रेरणा मिली। बोले- हमारा राष्ट्र समाज से बनता है। अपने समाज के लिए कार्य करें।

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