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धारी देवी मंदिर परिसर के नीचे अलकनंदा झील में एक दूसरे के ऊपर चढ़ी बोट का वीडियो हो रहा है वायरल।
सुधीर रावत, श्रीनगर गढ़वाल। धारी देवी मंदिर परिसर के नीचे अलकनंदा झील में संचालित हो रही वाटर बोटें अब विवाद के साथ सुरक्षा चिंता का कारण भी बन गई हैं।
मंदिर के शांत धार्मिक वातावरण पर प्रभाव और हाल में हुई बोट टक्कर की घटना के बाद स्थानीय लोगों, श्रद्धालुओं और मंदिर समिति ने बोट संचालन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस हादसे का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है।
मंदिर के समीप झील क्षेत्र में नगर निगम द्वारा बोटों का संचालन किया जा रहा है। मंदिर समिति के अनुसार इस संबंध में शिकायत रजिस्टर में अब तक 200 से अधिक आपत्तियां दर्ज हो चुकी हैं।
श्रद्धालुओं, साधु-संतों और ग्रामीणों का कहना है कि बोटों से होने वाला शोर पूजा-अर्चना में बाधा डाल रहा है और धार्मिक मर्यादा प्रभावित हो रही है।
इसी बीच बीते रविवार सुबह मंदिर के नीचे झील में दो बोटों की आपस में टक्कर हो गई। उस समय बोटों में केवल चालक सवार थे, जिससे बड़ा हादसा टल गया। बताया जा रहा है कि एक बोट फरासू की ओर से मंदिर के पास संचालन के लिए आ रही थी और मंदिर के समीप पहुंचते ही दोनों बोटें भिड़ गईं। यदि उस समय श्रद्धालु मौजूद होते तो गंभीर दुर्घटना हो सकती थी।
मंदिर समिति के प्रबंधक लक्ष्मी प्रसाद पांडे ने बताया कि पूर्व में उपजिलाधिकारी श्रीनगर को पत्र भेजकर बोट संचालन मंदिर से कम से कम 500 मीटर दूर स्थानांतरित करने की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि बोट संचालन से युवाओं को रोजगार मिल रहा है, इसका विरोध नहीं है, लेकिन इसे मंदिर परिसर से दूर गोवा बीच अथवा श्रीनगर की ओर गुफा के समीप संचालित किया जाना चाहिए।
समिति का कहना है कि धार्मिक आस्था, सुरक्षा और पर्यटन तीनों के संतुलन के लिए प्रशासन को जल्द निर्णय लेना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।
मंदिर समिति की मांग को समर्थन है। पूर्व में ग्रामसभा द्वारा भी मंदिर समिति से इसे लेकर अनुरोध किया गया था। धार्मिक स्थल के आसपास वाटर बोट संचालन उचित नहीं है। इसके लिए प्रशासन को एक निर्धारित स्थान तय करना चाहिए, जो मंदिर से पर्याप्त दूरी पर हो। निगम बोर्ड बैठक में बोटों के संचालन को लेकर तय हुए नियमों के अनुरूप संचालन होना चाहिए।
सोहन प्रसाद पांडे, ग्राम प्रधान धारी
वाटर बोटों के संचालन को लेकर उपयुक्त स्थल तय करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि यह बोटों के संचालन का यह मुख्य केंद्र है, लेकिन मंदिर समिति और श्रद्धालुओं की मांग को देखते हुए मंदिर परिसर से कुछ दूरी पर इन बोटों का संचालन को लेकर योजना तैयार की जा रही है।
रविराज बंगारी, सहायक नगर आयुक्त, नगर निगम श्रीनगर
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