मंगल ग्रह पर मौजूद रोवर पर्सवरेंस से ली गई सूर्य की सतह पर छाए सन स्पाट की तस्वीर। सौ: डा वहाबउद्दीन।
रमेश चंद्रा, नैनीताल। सूर्य की सतह पर सन स्पाट (सौर धब्बे) छाए हुए है। यह धब्बे पृथ्वी से कहीं अधिक मंगल (मार्स) ग्रह से स्पष्ट नजर आ रहे हैं। मंगल पर मौजूद रोवर पर्सवरेंस ने सूर्य के सतह पर छाये आधा दर्जन सन स्पाट की तस्वीरें कैद कर भेजी हैं।
आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) के पूर्व निदेशक व सौर विज्ञानी डा. वहाबउद्दीन ने बताया कि हम उन्नत तकनीक व सुविधाओं के उपलब्ध होने के बाद अंतरिक्ष की गहराइयों में झांक पाने की क्षमता हासिल कर चुके हैं।
सौरमंडल के दूसरे ग्रहों से भी सूर्य के पिछले हिस्से को देख पाने में सक्षम हो चुके हैं। हाल में मंगल पर मौजूद रोवर पर्सवरेंस ने सूर्य की सतह की तस्वीरें भेजी हैं।
तस्वीरों में साफ नजर आ रहा है कि सूर्य की सतह पर अभी भी सन स्पाट ग्रुप छाए हुए हैं। यह सन स्पाट सूर्य के पीछे के हिस्से में हैं और यह हिस्सा धरती से नजर नहीं आता है।
इन दिनों पृथ्वी से नजर आने वाले सूर्य के सामने का क्षेत्र शांत नजर आ रहा है। जिस कारण माना जा रहा था कि सूर्य पर गतिविधियां शांत हो चुकी है लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है।
रोवर पर्सवरेंस से भेजी गई तस्वीरों से पता चलता है कि सूर्य शांत न होकर बेहद सक्रिय है।
अब यह सन स्पाट आगे की तरफ बढ़ने शुरू होंगे तो विस्फोटों की संभावना बनी रहेगी। जिनसे विशाल ज्वालाओं के साथ सौर तूफानों का उठना जारी रहने की आशंका बनी रहेगी।
लिहाजा आने वाले दिनों में भी सौर विज्ञानियों को सूर्य की कड़ी निगरानी जारी रखनी पड़ेगी। अगले सप्ताह पुनः सौर सक्रियता बढ़ने की आशंका रहेगी।
अभी बना हुआ है सन स्पाट एआर-4366
डा. वहाबउद्दीन के अनुसार मंगल ग्रह से खतरनाक सन स्पाट एआर-4366 अभी भी बना हुआ है। यह सन स्पाट जबरदस्त विस्फोट कर चुका है।
इसने फरवरी में ही भयानक विस्फोटों के साथ छह बार एक्स क्लास की सोलर फ्लेयर (ज्वालाएं) उत्पन्न की थी। जिनसे सौर तूफान उठे थे।
यह सन स्पाट दो लाख किमी क्षेत्र में फैला हुआ था, जो पृथ्वी से नग्न आंखों से देखा जा सकता था। |
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