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25 करोड़ की आबादी में 7 करोड़ लोग बेहद गरीब: कंगाल पाकिस्तान की फिर खुली पोल, रिपोर्ट में और क्या पता चला?

Chikheang 1 hour(s) ago views 766
  

पाकिस्तान में गरीबी 11 साल के उच्च स्तर पर 29 प्रतिशत आबादी प्रभावित (फाइल फोटो)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पाकिस्तान में गरीबी दर बढ़कर 29 फीसदी हो गई है, जो पिछले 11 सालों में सबसे ज्यादा है। यह जानकारी सरकारी सर्वे में सामने आई, जिसे योजना मंत्री एहसान इकबाल चौधरी ने जारी किया। रिपोर्ट के मुताबिक देश में आय असमानता भी 27 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है।

सर्वे के अनुसार करीब 7 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी में जी रहे हैं। अत्यधिक गरीबी का मतलब है कि कोई व्यक्ति अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए हर महीने 8484 रुपये से कम कमाता है। वित्त वर्ष 2024-25 के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक गरीबी दर 2019 में 21.9 फीसदी थी, जो बढ़कर 28.9 फीसदी हो गई है। यह 2014 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
2014 के बाद घटने के बाद फिर बढ़ी गरीबी

रिपोर्ट में बताया गया है कि 2014 से 2019 के बीच गरीबी में कमी आई थी, लेकिन हाल के वर्षों में स्थिति तेजी से बिगड़ी है। बेरोजगारी दर भी बढ़कर 7.1 फीसदी हो गई है, जो 21 साल में सबसे ज्यादा है।

ग्रामीण इलाकों में गरीबी 28.2 फीसदी से बढ़कर 36.2 फीसदी हो गई है। वहीं शहरी क्षेत्रों में यह 11 फीसदी से बढ़कर 17.4 फीसदी पहुंच गई है। ग्रामीण इलाकों में बढ़ोतरी ज्यादा होने से साफ है कि महंगाई और आर्थिक मंदी का असर गांवों में ज्यादा पड़ा है।
सभी प्रांतों में बिगड़ी स्थिति

प्रांतवार आंकड़ों के अनुसार हर क्षेत्र में गरीबी बढ़ी है। पंजाब में गरीबी 16.5 फीसदी से बढ़कर 23.3 फीसदी हो गई। सिंध में यह 24.5 फीसदी से 32.6 फीसदी और खैबर पख्तूनख्वा में 28.7 फीसदी से बढ़कर 35.3 फीसदी पहुंच गई।

बलूचिस्तान सबसे गरीब प्रांत बना हुआ है, जहां गरीबी 42 फीसदी से बढ़कर 47 फीसदी हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में सुरक्षा चुनौतियों के कारण लोगों की आजीविका पर बुरा असर पड़ा है।
आय घटी, महंगाई ने बढ़ाई मुश्किल

पिछले सात सालों में वास्तविक मासिक घरेलू आय 12 फीसदी घटकर 31,127 रुपये रह गई है। वहीं वास्तविक खर्च 5.4 फीसदी कम हुआ है। इसका मतलब है कि आय में नाममात्र बढ़ोतरी हुई, लेकिन महंगाई उससे ज्यादा बढ़ गई।

मंत्री एहसान इकबाल ने माना कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के कार्यक्रम के तहत दी गई शर्तें, जैसे सब्सिडी में कटौती और मुद्रा अवमूल्यन, लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाली रहीं। इसके अलावा प्राकृतिक आपदाएं और कमजोर आर्थिक वृद्धि भी कारण बताए गए।

उन्होंने कहा कि बेनेजीर इनकम सपोर्ट प्रोग्राम के तहत दी जाने वाली नकद सहायता स्थायी समाधान नहीं है। गरीबी कम करने के लिए स्थायी आर्थिक विकास और रोजगार सृजन जरूरी है। हालांकि उन्होंने IMF कार्यक्रम से जल्द बाहर निकलने की संभावना से इनकार किया, लेकिन उम्मीद जताई कि आय में सुधार से धीरे-धीरे गरीबी कम होगी।

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