search

पवित्र नगरी, पर मैला जल : खरगोन के मंडलेश्वर में आचमन योग्य नहीं रही नर्मदा नदी, 10 गुना तक मिल रही गंदगी

cy520520 Yesterday 22:27 views 178
  

नर्मदा में सीधे मिल रहा है नाले में बहकर आया गंदा पानी। (फाइल फोटो)



डिजिटल डेस्क, इंदौर। आस्था की धारा मानी जाने वाली नर्मदा नदी में बढ़ते प्रदूषण ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने और कई शहरों को पवित्र नगरी घोषित किए जाने के बावजूद हालात ऐसे हैं कि खरगोन जिले के मंडलेश्वर में नर्मदा का पानी आचमन योग्य भी नहीं बचा। यह तथ्य हाल ही में विधानसभा में भी स्वीकार किया गया।
तय मानकों से कई गुना अधिक प्रदूषण

जांच रिपोर्टों के अनुसार नालों से होकर नदी में पहुंच रहा दूषित पानी निर्धारित मानकों से 4 से 10 गुना तक अधिक प्रदूषित है। बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड), सीओडी (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) और सस्पेंडेड सॉलिड की मात्रा चिंताजनक स्तर पर दर्ज की गई है।

  • उपचारित जल में बीओडी 10 मिग्रा/लीटर होना चाहिए, जबकि वर्तमान में 40–50 मिग्रा/लीटर तक मिल रहा है।
  • सीओडी का मानक 50 मिग्रा/लीटर है, लेकिन 150–200 मिग्रा/लीटर तक दर्ज हो रहा है।
  • सस्पेंडेड सॉलिड 10 मिग्रा/लीटर होना चाहिए, जबकि 100–150 मिग्रा/लीटर तक पाया गया।

पवित्र नगरियों में भी वही हाल

महेश्वर, मंडलेश्वर और ओंकारेश्वर को पवित्र नगरी का दर्जा प्राप्त है, लेकिन यहीं से गंदे नालों का पानी सीधे नर्मदा में मिल रहा है। बड़वाह-सनावद, खरगोन, खंडवा और बड़वानी क्षेत्रों से भी प्रदूषण की स्थिति गंभीर बताई गई है।
एसटीपी कागजों पर, जमीन पर अधूरा काम

छह नगरीय निकायों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) प्रस्तावित हैं और कुछ जगह निर्माण भी हुआ है, लेकिन अब तक एक भी प्लांट पूर्ण क्षमता से संचालित नहीं हो पाया। यहां तक कि खरगोन में कुंदा नदी पर एसटीपी होने के बावजूद नालों की गंदगी सीधे नर्मदा में पहुंच रही है।

यह भी पढ़ें- धार में युवक को रस्सी से बांधकर बेरहमी से पीटा, वीडियो वायरल होने के बाद तीन गिरफ्तार, दो की तलाश जारी
नोटिस और न्यायालयी कार्रवाई

मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने संबंधित छह निकायों को कई बार नोटिस जारी किए हैं और 42.50 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग भी की थी। हालांकि राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने निकायों को क्षतिपूर्ति से राहत दी है। फिलहाल इन निकायों के खिलाफ न्यायालय में परिवाद प्रचलित है।

आस्था और पर्यावरण संरक्षण के बीच बढ़ती खाई ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि पवित्र मानी जाने वाली नदी को स्वच्छ रखने के दावों पर अमल कब होगा।
like (0)
cy520520Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
cy520520

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1610K

Credits

Forum Veteran

Credits
161352