बंगाल में SIR पर हाई कोर्ट में उच्चस्तरीय बैठक न्यायिक अफसरों की छुट्टियां रद (फाइल फोटो)
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को लेकर जारी गतिरोध के बीच न्यायपालिका ने कमान संभाल ली है।
एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल ने शनिवार को एक उच्च स्तरीय बैठक की, जिसमें राज्य के प्रशासनिक और चुनावी शीर्ष अधिकारियों के साथ कार्यों की रूपरेखा तैयार की गई।
शीर्ष अदालत द्वारा राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच \“अविश्वास\“ की स्थिति पर चिंता जताने के बाद अब मतदाता सूची की विसंगतियों को दूर करने का जिम्मा न्यायिक अधिकारियों के कंधों पर होगा।
न्यायिक निगरानी में होगा डेटा का मिलान
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, अब मतदाता सूची में मौजूद तार्किक विसंगतियों और दावों का निपटारा जिला न्यायाधीशों और सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों की देखरेख में किया जाएगा। इस अभूतपूर्व आदेश के क्रियान्वयन के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने एक अधिसूचना जारी कर राज्य के सभी न्यायिक अधिकारियों की छुट्टियां नौ मार्च तक रद कर दी हैं।
विशेष परिस्थितियों और चिकित्सा आपातकाल को छोड़कर किसी भी न्यायाधीश व न्यायिक अधिकारियों को अवकाश नहीं मिलेगा। यहां तक कि न्यायिक अकादमी में होने वाले सभी प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी स्थगित कर दिया गया है। जो अधिकारी अवकाश पर हैं, उन्हें 23 फरवरी तक काम पर लौटने का निर्देश दिया गया है ताकि 28 फरवरी को मतदाता सूची के प्रकाशन से जुड़ी प्रक्रिया समय पर पूरी की जा सके।
किसी भी पात्र मतदाता का नाम नहीं छूटे
शनिवार को हुई मैराथन बैठक में मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, राज्य के पुलिस महानिदेशक पीयूष पांडेय और मुख्य चुनावी अधिकारी मनोज अग्रवाल मौजूद रहे। बैठक के बाद मनोज अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि आयोग का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम सूची से न छूटे।
उन्होंने बताया कि राज्य की 294 विधानसभा सीटों के लिए न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे। हालांकि अंतिम सूची 28 फरवरी को ही प्रकाशित होगी, लेकिन न्यायिक अधिकारियों की सिफारिशों के आधार पर बाद में पूरक सूचियां भी जारी की जा सकती हैं।
बैठक में डीजीपी को निर्देश दिया गया कि वे इन न्यायिक अधिकारियों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करें। साथ ही जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया गया कि वे अधिकारियों के लिए आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक संसाधन तुरंत उपलब्ध कराएं।
समाप्त करने को कहा \“ब्लेम गेम\“
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची की शुद्धता एक संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच चल रहे \“ब्लेम गेम\“ को समाप्त कर डेटा के मिलान पर ध्यान केंद्रित करने को कहा।
जहां सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने न्यायिक हस्तक्षेप का स्वागत करते हुए इसे निष्पक्षता की जीत बताया है, वहीं विपक्षी भाजपा का आरोप है कि राज्य सरकार जानबूझकर विसंगतियों को बढ़ावा दे रही थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्य चुनावी राज्यों की तुलना में बंगाल में न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति का यह आदेश राज्य की प्रशासनिक साख पर एक गंभीर टिप्पणी है।
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