हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव पर हलचल तेज हो गई है। प्रतीकात्मक फोटो
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को निर्धारित समयसीमा के भीतर संपन्न कराने के लिए प्रशासनिक गतिविधियों में तेजी लाई गई है। पंचायती राज विभाग ने जारी किए गए शेड्यूल के आधार पर सभी तैयारियों को पूरा करने के निर्देश दिए हैं, ताकि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार 31 मई से पहले चुनाव कराए जा सकें और परिणाम भी घोषित किए जा सकें।
जिला परिषद वार्डों के परिसीमन का कार्य आरंभ कर दिया गया है, जिसे चुनावी प्रक्रिया का पहला महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। परिसीमन के पूरा होने के बाद 31 मार्च से पहले आरक्षण रोस्टर जारी किया जाएगा, जिससे चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा का मार्ग प्रशस्त होगा।
दिसंबर में चुनाव की थी तैयारी
हिमाचल प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग दिसंबर के दूसरे सप्ताह में चुनाव कराने की तैयारियों में जुटा था। हालांकि, आरक्षण रोस्टर जारी न होने और मतदाता सूचियों के अधिसूचित एवं छपाई न होने से चुनाव नहीं हो सके।
तो 25 मार्च से पहले आएगा रोस्टर
जानकारी के अनुसार, परिसीमन प्रक्रिया के पूर्ण होने के बाद आरक्षण रोस्टर 25 मार्च से पहले जारी करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि चुनाव कार्यक्रम तय करने में कोई देरी न हो।
कोर्ट में मामला जाने के बाद क्या हुआ
स्थानीय श्हारी निकाय चुनाव पिछले वर्ष दिसंबर में प्रस्तावित थे, लेकिन प्रदेश में आपदा एक्ट लागू होने के कारण चुनाव टाल दिए गए। इसके बाद मामला न्यायालय में पहुंचा और समयसीमा को लेकर कानूनी प्रक्रिया चली। पहले हाई कोर्ट ने चुनाव कराने के लिए 30 अप्रैल तक की समयसीमा निर्धारित की थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इसे बढ़ाकर 31 मई तक कर दिया।
ग्रामीण स्तर पर चुनावी माहौल बनना शुरू
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतदाता सूची का अद्यतन, चुनाव कार्यक्रम की घोषणा, नामांकन और मतदान की तैयारियां चरणबद्ध तरीके से की जाएंगी। चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों और संभावित प्रत्याशियों में हलचल तेज हो गई है, जिससे ग्रामीण स्तर पर चुनावी माहौल बनना शुरू हो गया है।
पुनर्गठन व अपील के लिए समयसीमा तय
जिला परिषद वार्डों के पुनर्गठन को लेकर आपत्तियों और दावों के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की गई है। पुनर्गठन से संबंधित मामलों में जिला उपायुक्त के समक्ष अपील के लिए सात दिन का समय निर्धारित किया गया है। जिलास्तर पर निर्णय के बाद मंडलायुक्त के पास भी सात दिन में अपील की जा सकेगी। तय समय सीमा में निस्तारण के बाद परिसीमन प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिससे आरक्षण रोस्टर जारी किया जा सके।
यह भी पढ़ें: हिमाचल प्रदेश में बिजली की दरें बढ़ाने पर बहस तेज, जनसुनवाई में हुआ खूब हंगामा; अब 24 फरवरी पर टिकी निगाहें |
|