दि बिहार टीचर्स हिस्ट्री मेकर ने आयोजित सम्मान समारोह में 101 गुरुजनों को उनके शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। घंटाघर स्थित शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय का सभागार रविवार को शिक्षा के रंग में रंगा नजर आया। दि बिहार टीचर्स हिस्ट्री मेकर की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में जिले भर के 101 गुरुजनों को उनके शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
मंच पर बुलाए गए शिक्षकों में डा. अमृत, नीलू कुमारी, लीना कुमारी, इफत इमरान, रंजीत रविदास, डा. आमोद सहित अन्य कई शिक्षक शामिल थे। इस अवसर पर तालियों की गूंज के बीच शिक्षकों के चेहरे पर संतोष और गर्व झलक रहा था। समारोह का शुभारंभ डा. एनके यादव, प्रवीण कुशवाहा और डा. नितेश कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया।
एमएलसी डा. एनके यादव ने कहा कि गुरुजनों का सम्मान समाज की चेतना को मजबूत करता है। वहीं, डा. नितेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा में नवाचार, समर्पण और नए प्रयोग से ही बच्चों की प्रतिभा निखरती है।
शैक्षिक प्रस्तुति और प्रदर्शनी
समारोह के दौरान शिक्षकों ने बच्चों में पढ़ाई के प्रति जिज्ञासा और रचनात्मकता बढ़ाने के लिए अभिनय, शैक्षिक लोकनृत्य, कव्वाली और लोकगीत प्रस्तुत किए। इसके अलावा, शिक्षण सामग्री की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें देसी संसाधनों से तैयार मॉडल और चार्ट दर्शकों का ध्यान आकर्षित करते रहे। इस प्रयास ने यह संदेश दिया कि सीमित साधनों में भी बेहतर शिक्षा संभव है।
- टीटीसी में द बिहार टीचर्स हिस्ट्री मेकर द्वारा आयोजित हुआ सम्मान समारोह, शैक्षणिक लोकगीत नृत्य से हुआ गुलजार
- संस्था के संस्थापक बोले यह सम्मान उन शिक्षकों के नाम, जो चुपचाप अपने विद्यालयों में नवाचार कर रहे
संस्था के संस्थापक डा. गौरव कुमार ने कहा कि यह मंच उन शिक्षकों को पहचान दिलाने का प्रयास है, जो चुपचाप अपने विद्यालयों में नवाचार कर रहे हैं। उनका कहना था कि ऐसे शिक्षक शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समारोह में अध्यक्ष रीना कुमारी, मीडिया प्रभारी डा. अमृता, प्राचार्या मीनाक्षी चतुर्वेदी और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान की प्राचार्या श्रुति सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन न केवल शिक्षक सम्मान के उद्देश्य से हुआ, बल्कि यह बच्चों और अभिभावकों को शिक्षा के महत्व और नवाचार की प्रेरणा देने वाला भी साबित हुआ। |