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बांग्लादेशी टेरर मॉड्यूल के खुलासे में ISI के सपोर्ट और आतंकी लोन का आया नाम; शाहीनबाग फिर चर्चा में

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मुख्य हैंडलर शब्बीर अहमद लोन ने युवाओं को भर्ती करने और उन्हें भड़काने के लिए कई भारतीय शहरों के बीच आने-जाने के लिए गैर-कानूनी रास्तों का इस्तेमाल किया।



मोहम्मद साकिब, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा गिरफ्तार किए गए बांग्लादेशी टेरर माॅड्यूल के आठ आतंकियों से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। पूछताछ में पता चला है कि मुख्य हैंडलर शब्बीर अहमद लोन ने युवाओं को भर्ती करने और उन्हें भड़काने के लिए बांग्लादेश और दिल्ली समेत कई भारतीय शहरों के बीच आने-जाने के लिए गैर-कानूनी रास्तों का इस्तेमाल किया।
दूसरी बार आया आतंकी लोन का नाम

आरोप है कि वह पिछले साल इसी मकसद से दिल्ली के शाहीन बाग गया था। पुलिस सूत्रों ने बताया कि जांच के तहत शाहीनबाग के कुछ लोगों से भी पूछताछ की गई है। सुरक्षा एजेंसियों के लाल किले के पास आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संभावित आतंकी हमले के अलर्ट जारी करने के दो दिन बाद इस माॅड्यूल का भंडाफोड़ हुआ।

पुलिस ने दावा किया कि इसे पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) का सपोर्ट है। यह दूसरी बार है जब लोन का नाम आतंकी गतिविधि के सिलसिले में सामने आया है। वह श्रीनगर के कंगन गांव का रहने वाला है।
कोर्ट ने कर दिया था बरी

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, लोन को स्पेशल सेल ने 27 जुलाई 2007 को लश्कर का सदस्य होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 2012 में, दिल्ली की एक कोर्ट ने उसे पिस्टल रखने के आरोप में आर्म्स एक्ट के सेक्शन 25, 54 और 59 के तहत दोषी पाए जाने पर छह साल जेल की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने उसे आईपीसी के सेक्शन 121, 121-ए/122 और एंटी-टेरर यूएपीए एक्ट के सेक्शन 17, 18 और 20 के तहत बरी कर दिया था।
गैर-कानूनी रास्ते से बांग्लादेश भाग गया

उस समय, स्पेशल सेल ने लोन से 280 यूएस डाॅलर बरामद करने का भी दावा किया था, जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2009 में उसके खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) केस दर्ज किया था। 2019 में, उसे पीएमएलए केस में एक कोर्ट ने ज़मानत दे दी थी। कोर्ट ने आदेश दिया कि लोन सीधे या किसी और तरह से मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति को कोई धमकी, लालच या वादा नहीं करेगा और कोर्ट की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेगा। लेकिन वह देश छोड़कर गैर-कानूनी रास्ते से बांग्लादेश भाग गया।
जमात-उद-दावा से जुड़े बड़े लोगों के संपर्क में था लोन

पुलिस ने आगे आरोप लगाया कि 2007 में गिरफ्तारी के समय, लोन के जमात-उद-दावा से जुड़े बड़े लोगों, जिनमें हाफिज सईद और जकी-उर-रहमान लखवी शामिल हैं उनके साथ संपर्क में था। इन दावों का हवाला पुलिस की क्राॅस-बाॅर्डर मिलिटेंट नेटवर्क की बड़ी जांच के हिस्से के तौर पर दिया गया था।

पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि लोन ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओसी) के मुजफ्फराबाद में एक ट्रेनिंग फैसिलिटी में बेसिक (दौरा-ए-आम) और एडवांस्ड (दौरा-ए-खास) कोर्स सहित मिलिटेंट ट्रेनिंग ली थी।

पुलिस ने कहा कि लोन अब उन भगोड़ों में से है जिनकी भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को सबसे अधिक तलाश है। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक, वह ‘राजा’ और ‘कश्मीरी’ नामों से भी जाना जाता है।
कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन के खंभों पर लगे थे पोस्टर

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बंगाल और तमिलनाडु में सक्रिय अपने सहयोगियों के साथ मिलकर एक टेरर माड्यूल से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई सात फरवरी को कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन के खंभों पर \“फ्री कश्मीर\“ के पोस्टर लगाए जाने की घटना के बाद तेज हुई, जो एआइ समिट से कुछ सप्ताह पहले सामने आई थी। गिरफ्तार आरोपितों में बंगाल के उमर फारुक शामिल है, जो मार्च 2025 में शब्बीर अहमद लोन के संपर्क में आया था।
महत्वपूर्ण स्थानों की रेकी

पुलिस का दावा है कि उस समय लोन भारत में मौजूद था और उसने उमर को भारत में लश्कर-ए-तैयबा के आपरेशन की जिम्मेदारी सौंपी। आरोप है कि बांग्लादेशी नागरिकों को फर्जी पहचान के जरिए भर्ती कर महत्वपूर्ण स्थानों की रेकी कराई जानी थी। बीते वर्ष दिसंबर में वीडियो भेजने और आगे निर्देश के लिए बांग्लादेश में मिलने को कहा गया था।

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