अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप। (फाइल)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सैन्य टकराव टालने के लिए अमेरिका और ईरान के वार्ताकार गुरुवार को फिर साथ बैठकर समझौते की संभावना तलाशेंगे। यह जानकारी ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल्बूसईदी ने दी है। ओमान दोनों देशों के बीच मध्यस्थता कर टकराव की आशंका खत्म करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका ने इस समय ईरान की अभूतपूर्व घेराबंदी कर रखी है। अमेरिकी युद्धपोत और लड़ाकू विमान कार्रवाई के लिए अलर्ट मोड पर हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान ने अगर समझौता नहीं किया तो उसके साथ वास्तव में बुरा होगा। अमेरिका ईरान के साथ पारदर्शी परमाणु समझौता चाहता है जिसमें सब कुछ स्पष्ट हो। अमेरिका की ओर से वार्ता कर रहे ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति इस बात को लेकर संशय में हैं कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर क्यों अति गोपनीयता बरत रहा है। अगर वह बिजली उत्पादन के लिए कार्यक्रम चला रहा है तो फिर उसे गोपनीयता बरतने की क्या जरूरत है।
जवाब में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागजी ने कहा है कि हमारे परमाणु कार्यक्रम को लेकर संशय पालने की क्या जरूरत है। हम संप्रभु राष्ट्र हैं। हम किसी भी सूरत में समर्पण नहीं करेंगे, हम स्वाभिमानी ईरानी हैं। वैसे ईरान पूर्व में परमाणु हथियार बनाने से इनकार कर चुका है।
विदित हो कि जिनेवा में अरागची और विटकाफ के नेतृत्व में दोनों देशों के अधिकारियों की वार्ता होगी। इस बीच अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने लेबनान में बहुत जरूरी राजनयिकों को छोड़कर बाकी के अधिकारियों को दूतावास और लेबनान छोड़ने के लिए कहा है। ईरान के साथ सैन्य टकराव की स्थिति में लेबनान में रहने वाले अमेरिकी नागरिकों को खतरा पैदा हो सकता है।
(समाचार एजेंसी रॉयटर्स के इनपुट के साथ)  |
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