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Holashtak 2026: होलाष्टक के पहले दिन करें भगवान नरसिंह की आरती, शुभ फलों की होगी प्राप्ति

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Holashtak 2026: होलाष्टक के दौरान करें ये आरती। (Ai Generated Image)



धर्म डेक्स, नई दिल्ली। होलाष्टक के 8 दिन भक्त प्रहलाद की अटूट भक्ति और उनकी रक्षा के लिए लिए गए भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार से जुड़े हैं। इन दिनों (Holashtak 2026) में भले ही मांगलिक कामों की मनाही होती है, लेकिन पूजा-पाठ के लिए यह समय बहुत फलदायी माना जाता है। वहीं, इस दौरान भगवान नरसिंह की आरती करने से भी जीवन की नकारात्मकता दूर होती है और शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
ऐसे करें आरती

  • सुबह उठकर स्नान करें।
  • भगवान नरसिंह का ध्यान करें।
  • उनकी विधिवत पूजा करें।
  • उन्हें फल, मिठाई, फूल-माला आदि अर्पित करें।
  • अंत में भगवान नरसिंह की आरती करें।
  • पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगे।
  
।।श्री नरसिंह भगवान की आरती।।

ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।

स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे, स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे, जन का ताप हरे॥

ॐ जय नरसिंह हरे...

तुम हो दीन दयाला, भक्तन हितकारी, प्रभु भक्तन हितकारी।

अद्भुत रूप बनाकर, अद्भुत रूप बनाकर, प्रकटे भय हारी॥

ॐ जय नरसिंह हरे...

सबके ह्रदय विदारण, दुस्यु जियो मारी, प्रभु दुस्यु जियो मारी।

दास जान अपनायो, दास जान अपनायो, जन पर कृपा करी॥

ॐ जय नरसिंह हरे...

ब्रह्मा करत आरती, माला पहिनावे, प्रभु माला पहिनावे।

शिवजी जय जय कहकर, पुष्पन बरसावे॥

ॐ जय नरसिंह हरे...

नरसिंह भगवान की आरती

आरती कीजै नरसिंह कुंवर की ।

वेद विमल यश गाउँ मेरे प्रभुजी ॥

पहली आरती प्रह्लाद उबारे ।

हिरणाकुश नख उदर विदारे ॥

दुसरी आरती वामन सेवा ।

बल के द्वारे पधारे हरि देवा ॥

तीसरी आरती ब्रह्म पधारे ।

सहसबाहु के भुजा उखारे ॥

चौथी आरती असुर संहारे ।

भक्त विभीषण लंक पधारे ॥

पाँचवीं आरती कंस पछारे ।

गोपी ग्वाल सखा प्रतिपाले ॥

तुलसी को पत्र कंठ मणि हीरा ।

हरषि-निरखि गावे दास कबीरा ॥
।।भगवान विष्णु की आरती।।

ॐ जय जगदीश हरे आरती

ॐ जय जगदीश हरे...

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।

भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

ॐ जय जगदीश हरे...

जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।

स्वामी दुःख विनसे मन का।

सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

ॐ जय जगदीश हरे...

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।

स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।

तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥

ॐ जय जगदीश हरे...

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।

स्वामी तुम अन्तर्यामी।

पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥

ॐ जय जगदीश हरे...

तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।

स्वामी तुम पालन-कर्ता।

मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥

ॐ जय जगदीश हरे...

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।

स्वामी सबके प्राणपति।

किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥

ॐ जय जगदीश हरे...

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

स्वामी तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठा‌ओ, द्वार पड़ा तेरे॥

ॐ जय जगदीश हरे...

विषय-विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा।

स्वामी पाप हरो देवा।

श्रद्धा-भक्ति बढ़ा‌ओ, संतन की सेवा॥

ॐ जय जगदीश हरे...

श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।

स्वामी जो कोई नर गावे।

कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥

ॐ जय जगदीश हरे...

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।   
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