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गोरखपुर में शिक्षक आत्महत्या मामला: सुसाइड नोट में जिनका नाम पुलिस करेगी उनसे पूछताछ, ‘बाबू’ फरार

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मृतक शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह। जागरण  



जागरण संवाददाता, गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है। सुसाइड नोट में जिन दो अन्य शिक्षकों देवरिया की अपर्णा तिवारी, कुशीनगर के ओंकार सिंह समेत जिन लोगों का जिक्र है, बयान दर्ज करने के लिए पुलिस उन्हें बुलाएगी। वहीं, मुकदमे में नामजद मुख्य आरोपित देवरिया बीएसए कार्यालय के बाबू संजीव सिंह के घर रविवार रात में गुलरिहा पुलिस पहुंची तो देवरिया कोतवाली क्षेत्र में स्थित घर पर ताला बंद मिला।  

सुसाइड नोट में कृष्ण मोहन सिंह ने लिखा था कि देवरिया के गौरीबाजार स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय में उनके साथ नियुक्त दो अन्य शिक्षकों अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह से भी 16-16 लाख रुपये की मांग की गई थी। बताया जा रहा है कि इन दोनों ने भी अलग-अलग तारीखों में रकम दी थी। कृष्ण मोहन सिंह को अपनी पत्नी के गहने गिरवी रखने और दो बीघा जमीन बेचने तक की नौबत आ गई थी।

पुलिस इनके बयानों से यह स्पष्ट करना चाहती है कि आरोपित बाबू संजीव सिंह और बीएसए शालिनी श्रीवास्तव की वसूली की पूरी कड़ी क्या थी और किस-किस का हाथ इस मामले में शामिल था। रविवार को गुलरिहा पुलिस जब देवरिया में बाबू के आवास पर पहुंची तो ताला बंद देख पड़ोसियों पूछा तो उन्होंने बताया कि वह शनिवार से ही नहीं है। सुसाइड नोट में कृष्ण मोहन सिंह ने पूर्व प्रधानाध्यापक अनिल सिंह पर भी गंभीर आरोप लगाए थे।

उन्होंने लिखा था कि अनिल सिंह ने ही उनका परिचय बीएसए कार्यालय के बाबू संजीव सिंह से कराया था और पैसे के सौदे में मध्यस्थता की थी। गुलरिहा पुलिस अनिल से भी पूछताछ करेगी।

यह है मामला
कुशीनगर जिले के मूल निवासी कृष्ण मोहन सिंह शिवपुर सहबाजगंज में अपने बड़े भाइ के मकान पर परिवार के साथ रहते थे। कृष्ण मोहन सिंह, अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह की नियुक्ति एक जुलाई, 2016 को देवरिया के गौरीबाजार स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक पद पर हुई थी।

वर्ष 2021 में तत्कालीन बीएसए देवरिया संतोष राय द्वारा कराई गई जांच में कई अनियमितताएं पाई गईं, जिसके बाद एसटीएफ ने तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी समेत कई लोगों को जेल भेज दिया था। इस केस में कृष्ण मोहन सहित कई शिक्षकों पर भी एफआइआर दर्ज हुई थी।

पांच साल तक इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई चली। 13 फरवरी, 2025 को हाई कोर्ट ने कृष्ण मोहन के पक्ष में आदेश दिया, लेकिन जब वे इस आदेश के अनुपालन के लिए बीएसए कार्यालय पहुंचे तो उन्हें नया संकट झेलना पड़ा।

आरोप है कि 20 फरवरी को कार्यालय बुलाकर कृष्ण मोहन को अपमानित किया गया इससे तंग आकर 21 फरवरी की सुबह कृष्ण मोहन ने फंदे से लटककर जान दे दी। उनके पास से चार पन्ने का सुसाइड नोट मिला जिसमें उन्होंने बीएसए उनके बाबू व सहयोगियों को इसका जिम्मेदार बताया है।


फरार बाबू संजीव सिंह की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। सभी संबंधित पक्षों से पूछताछ कर साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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- अभिनव त्यागी,एसपी सिटी   
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