आईडीएफसी फर्स्ट बैंक मामले में नया मोड़
नई दिल्ली। प्राइवेट सेक्टर के बैंक पहले से ही धीमे डिपॉजिट मोबिलाइजेशन की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में फ्रॉड (IDFC First Bank Fraud) का ताजा मामला इन बैंकों की चिंता बढ़ा सकता है। दरअसल जानकारों का मानना है कि अगर सरकारी बैलेंस का एक हिस्सा उनकी बुक्स से बाहर चला जाता है, तो उन पर फिर से दबाव पड़ सकता है। यानी अगर सरकार ने प्राइवेट बैंकों से अपना पैसा निकाला, तो उनके पास डिपॉजिट और कम हो जाएगा। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने वीकेंड में अपनी चंडीगढ़ ब्रांच में हरियाणा सरकार के अकाउंट्स में 590 करोड़ रुपये के संदिग्ध फ्रॉड का खुलासा किया।
किस सरकारी बैंकों को होगा फायदा?
अनुमान है कि प्राइवेट लेंडर्स से कम लागत वाले करंट और सेविंग्स अकाउंट्स (CASA) के किसी भी माइग्रेशन की स्थिति में बड़े सरकारी बैंकों, खासकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब नेशनल बैंक को फायदा होने की संभावना है, जो सरकारी बैंकिंग की मजबूत कड़ी हैं।
हरियाणा सरकार ने IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी काम करने से डी-एम्पैनल्ड कर दिया है। यानी इन बैंकों के इस्तेमाल सरकारी कामों के लिए नहीं होगा। IDFC फर्स्ट बैंक के लिए, हरियाणा सरकार का फंड कुल डिपॉजिट का लगभग 0.4-0.5% है। राज्य और केंद्र सरकार के कुल डिपॉजिट का इसके डिपॉजिट बेस में 8-10% हिस्सा है।
IDFC फर्स्ट बैंक ने क्या कहा?
इस मामले पर IDFC फर्स्ट बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर वी वैद्यनाथन ने सोमवार को एक एनालिस्ट कॉल में कहा कि हमारे सरकारी क्लाइंट्स के साथ मजबूत रिश्ते हैं। हमें नहीं लगता कि इससे कोई सिस्टमिक दिक्कत होगी, लेकिन हम अपने प्रोसेस और सर्विस स्टैंडर्ड को और मजबूत करने के लिए कमिटेड हैं।
इन प्राइवेट बैंकों को भी मिल सकता है लाभ
अनुमान है कि IDFC फर्स्ट बैंक और AU SFB से अगर डिपॉजिट आउटफ्लो होता है, तो संभावित बेनिफिशियरी में PNB (हरियाणा में स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी का कन्वीनर) और SBI, केनरा और यूनियन बैंक जैसे दूसरे PSU बैंक शामिल हो सकते हैं।
वहीं साथ ही HDFC बैंक, ICICI बैंक और एक्सिस बैंक जैसे प्राइवेट लेंडर्स को भी इंक्रीमेंटल फ्लो देखने को मिल सकता है।
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