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सरकारी बैंक शेयरों में क्यों आ रही है तेजी? 6 महीने में 40% रिटर्न और 6 लाख करोड़ मुनाफा, एक्सपर्ट से समझें वजह

LHC0088 5 hour(s) ago views 764
  

एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा और पीएनबी जैसे शेयरों में लगातार तेजी आ रही है।



नई दिल्ली। शेयर बाजार (Share Market) में पिछले कुछ दिनों में आईटी शेयरों में जबरदस्त बिकवाली हुई है। इसके अलावा, मेटल व एनर्जी सेक्टर को छोड़कर ज्यादातर सेक्टर्स के शेयरों ने कोई खास रिटर्न नहीं दिया। लेकिन, इन सबके बीच सरकारी बैंक शेयरों (PSU Bank Shares) ने जबरदस्त चाल दिखाई है और लगातार मजबूती के साथ दमदार रिटर्न दिया है। सरकारी बैंकों ने पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह वापसी की है, उसने पूरे बाजार का नजरिया बदल दिया है। हाल की तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि PSU बैंक अब केवल स्थिर नहीं, बल्कि मजबूती के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

सबसे खास बात है कि भारत के 12 पीएसयू बैंकों (PSU Banks Market Cap) का संयुक्त बाजार पूंजीकरण पिछले 6 महीनों में 6 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 21.35 लाख करोड़ रुपये हो गया है। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स ने इस अवधि में 40 फीसदी रिटर्न दिया है जबकि प्राइवेट बैंक इंडेक्स महज 10 फीसदी तक रिटर्न ही डिलीवर कर पाए। सरकारी बैंक शेयरों में तेजी कुछ खास वजह हैं। आइये मार्केट एक्सपर्ट के नजरिये से इसे समझते हैं।
समझें हालात क्यों बदले?

इंडिपेंडेंट मार्केट एक्सपर्ट अभिषेक भट्ट ने कहा कि एक समय था जब PSU बैंक बढ़ते NPA (खराब कर्ज) और कमजोर बैलेंस शीट के कारण दबाव में थे। लेकिन, आज स्थिति अलग है क्योंकि NPA नियंत्रित स्तर पर, मुनाफे में डबल डिजिट ग्रोथ, मजबूत कैपिटल बेस, डिजिटल सुधार हुए हैं।

सरकार पहले ही कुछ बैंकों के मर्जर कर चुकी है और इन कदमों से लागत घटी, स्केल बढ़ा और प्रतिस्पर्धात्मक ताकत मजबूत हुई। अब जब बैंकिंग सेक्टर स्थिर हो चुका है, बाजार में यह चर्चा है कि क्या सरकार अगला चरण शुरू कर सकती है — खासकर मीडियम साइज PSU बैंकों के बीच। हालांकि, सरकारी बैंकों के मर्जर को लेकर चल रही चर्चाओं पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई रोडमैप नहीं है, बल्कि सरकार अब बैंकिंग सेक्टर को और एडवांस और मजबूत बनाने के लिए एक विशेष कमेटी का गठन करने जा रही है।
बैंकों के मर्जर की जरुरत क्यों?

  • स्केल की जरूरत – बड़े प्रोजेक्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस के लिए मजबूत बैलेंस शीट चाहिए।
  • लागत में कटौती – शाखाओं और टेक्नोलॉजी में दोहराव कम होगा।
  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा – बड़े बैंक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।
  • सरकार की रणनीति – “कम लेकिन मजबूत बैंक” मॉडल की दिशा में कदम।


हालांकि अभी सरकार का ऐसा कोई प्लान नहीं है, लेकिन बाजार संभावनाओं को पहले ही प्राइस करने लगा है।
DII क्यों खरीद रहे हैं PSU बैंक?

पिछले कुछ महीनों में घरेलू संस्थागत निवेशकों (म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां आदि) ने PSU बैंकों में हिस्सेदारी बढ़ाई है। इसके पीछे कई कारण हैं:

  • वैल्यूएशन अभी भी आकर्षक
  • प्राइवेट बैंकों की तुलना में PSU बैंक अभी भी कम प्राइस-टू-बुक पर ट्रेड कर रहे हैं।
  • बैलेंस शीट सुधरी
  • अब यह “टर्नअराउंड स्टोरी” नहीं बल्कि “सस्टेनेबल ग्रोथ स्टोरी” बन रही है।
  • मजबूत सरकारी सपोर्ट
  • सरकार का स्पष्ट संदेश है कि बैंकिंग सेक्टर को मजबूत रखा जाएगा।
  • स्थिर मुनाफा और डिविडेंड
  • PSU बैंक अब नियमित लाभ और आकर्षक डिविडेंड दे रहे हैं — जो DII के लिए महत्वपूर्ण है।

अब आगे क्या?

अगर सरकार मर्जर के अगले चरण की घोषणा करती है, तो:

  • छोटे/मीडियम PSU बैंकों में तेजी आ सकती है
  • वैल्यूएशन री-रेटिंग संभव
  • प्रतिस्पर्धा और दक्षता बढ़ेगी


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लेकिन निवेशकों को यह भी ध्यान रखना होगा कि मर्जर की प्रक्रिया में समय और समन्वय की चुनौतियां भी होती हैं। मजबूत नतीजे, संभावित मर्जर और DII की बढ़ती खरीदारी — ये संकेत देते हैं कि सरकारी बैंकों की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है, बल्कि शायद एक नया अध्याय शुरू होने वाला है।   
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