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सुप्रीम कोर्ट का आदेश: पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन के लिए जाएंगे ओडिशा और झारखंड के न्यायिक अधिकारी

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सुप्रीम कोर्ट ने अतिरिक्त न्यायिक अधिकारियों की तैनाती को मंजूरी दी



जागरण संवाददाता, अनुगुल। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चल रही व्यापक दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया में अब ओडिशा की भी अहम भूमिका तय हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट को झारखंड और ओडिशा से अतिरिक्त न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की अनुमति दे दी है, जिससे लाखों दावों के सत्यापन कार्य को गति मिलेगी।
80 लाख से अधिक दावे-आपत्तियां, समयसीमा बड़ी चुनौती:

सुनवाई के दौरान बताया गया कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत 80 लाख से अधिक दावे और आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। वर्तमान में लगभग 250 जिला न्यायाधीश इस कार्य में लगे हैं, परंतु उपलब्ध संख्या के आधार पर प्रक्रिया को पूरा करने में लगभग 80 दिन लग सकते हैं। अदालत ने माना कि निर्धारित समयसीमा को देखते हुए अतिरिक्त न्यायिक बल की आवश्यकता है।

इसी के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आवश्यकता पड़ने पर सिविल न्यायाधीशों के साथ-साथ ओडिशा और झारखंड के कार्यरत अथवा सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों को भी प्रतिनियुक्त किया जा सकता है।
खर्च उठाएगा केंद्रीय चुनाव आयोग:

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि प्रतिनियुक्त अधिकारियों के यात्रा, आवास तथा मानदेय सहित सभी खर्च का वहन भारत निर्वाचन आयोग करेगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संसाधनों की कमी के कारण सत्यापन कार्य प्रभावित न हो।
28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची:

सुप्रीम कोर्ट ने 28 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की निर्वाचन आयोग की समयसीमा को बरकरार रखा है। यदि कुछ मामलों का निस्तारण उस तिथि तक शेष रह जाता है, तो पूरक मतदाता सूची जारी कर उन्हें भी अंतिम सूची का हिस्सा माना जाएगा।
तार्किक विसंगतियों की भी होगी गहन जांच:

सुनवाई में अभिभावक के नाम में अंतर, आयु में असामान्य अंतर जैसी तार्किक विसंगतियों का भी उल्लेख किया गया। अदालत ने कहा कि इन मामलों की सावधानीपूर्वक और निष्पक्ष जांच आवश्यक है। अतिरिक्त न्यायिक अधिकारियों की तैनाती से प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।
ओडिशा के लिए जिम्मेदारी और प्रतिष्ठा का प्रश्न:

ओडिशा के न्यायिक अधिकारियों की संभावित तैनाती को राज्य की न्यायिक क्षमता और निष्पक्षता पर विश्वास के रूप में देखा जा रहा है। चुनावी प्रक्रिया जैसे संवेदनशील विषय में ओडिशा के अधिकारियों की भागीदारी राज्य के लिए प्रतिष्ठा का विषय मानी जा रही है।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच चल रहे आरोप-प्रत्यारोप पर चिंता जताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है।

कुल मिलाकर, शीर्ष अदालत का यह आदेश न केवल पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण को गति देगा, बल्कि ओडिशा और झारखंड की न्यायिक व्यवस्था की भूमिका को भी राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण बनाएगा।   
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