जागरण संवाददाता, हरदोई। 72 हजार बिजली उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर लगने के बाद भी सही बिल नहीं मिल पा रहा है। बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं के बिल को पोस्टपेड से प्रीपेड में बदल दिया है, लेकिन मोबाइल पर आने वाले प्रीपेड बिल में भी पोस्टपेड की राशि जुड़ी रहती है। बिल जमा करने पर उपभोक्ताओं को समस्या हो रही है और बिल संशोधन के लिए विभाग के चक्कर काटते हुए कई लोग निजी कर्मचारियों के आर्थिक दोहन का शिकार बन रहे हैं।
80 प्रतिशत उपभोक्ताओं के बिल गलत आ रहे हैं। मोबाइल पर बिल कुछ और दिखता है, जबकि सिस्टम पर बिल अलग है। उपभोक्ताओं की ओर से विभाग और हेल्पलाइन 1912 पर शिकायत दर्ज कराई जा रही है, मगर निदान नहीं हो पा रहा है। गलत बिल की समस्या के चलते उपभोक्ता इधर-उधर भटक रहे हैं।
वहीं, विभाग में कार्यरत निजी संस्था के कर्मचारी बिल सुधारने के नाम पर उपभोक्ताओं से पैसे वसूल कर रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर के आने के बावजूद इस तरह की गड़बड़ी और निजी कर्मचारियों का दोहन न केवल वित्तीय हानि बल्कि मानसिक तनाव का कारण बन रहा है।
यह है बानगी
सराय थोक निवासी संजय कुमार ने बताया कि उन्हें दो माह तक बिल नहीं मिला। जब बिल आया तो मोबाइल पर सात हजार रुपये दिखा, जबकि जमा करने गए तो सिस्टम पर 16 हजार रुपये का बिल था। 1912 पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोई निदान नहीं हुआ।
आलू थोक निवासी राम कुमार का बिल तीन माह से गलत आ रहा है। उन्होंने उपकेंद्र और अधिशासी अभियंता को प्रार्थना पत्र दिया, फिर भी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
रेलवे गंज निवासी लक्ष्मी को एक साथ 17 हजार रुपये का बिल आ गया, जबकि हर माह दो से ढाई हजार रुपये ही आता था। मीटर रीडिंग बीडीओ द्वारा तैयार कर विभाग को दी गई, लेकिन अभी तक बिल सही नहीं हुआ।
बिजली बिल बनने की आनलाइन व्यवस्था है, जिसकी जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था को दी गई है। उपभोक्ताओं की समस्याओं के निदान कराने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए कार्यदायी संस्था और सभी अधिशासी अभियंता को निर्देशित किया गया है। जल्द ही समस्या का निदान हो जाएगा।- राजीव भट्ट, अधीक्षण अभियंता  |