राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश में युवाओं को रोजगार के योग्य बनाने की दिशा में कौशल विकास के कार्यक्रमों को तेज किया जा रहा है।
वर्ष 2019 से फरवरी 2026 तक कौशल विकास मिशन के तहत 16,01,791 युवाओं का नामांकन हुआ, हालांकि अभी 2,97,652 युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार मिला है। मिशन अब प्रशिक्षण के साथ-साथ गुणवत्ता और प्लेसमेंट पर समान रूप से फोकस कर रहा है।
कौशल विकास योजनाओं को जिला-स्तर की जरूरतों से जोड़कर आगे बढ़ा रही है। प्रत्येक जिले में उद्योगों की मांग और युवाओं की रुचि के आधार पर प्रशिक्षण सेक्टर तय किए गए हैं, ताकि प्रशिक्षण सीधे रोजगार से जुड़ सके और युवाओं को बेहतर अवसर मिलें।
मिशन के अंतर्गत वर्तमान में 1,565 ट्रेनिंग पार्टनर और 13,398 प्रशिक्षण केंद्र सक्रिय हैं। युवाओं को औसतन 240 घंटे का प्रशिक्षण देकर रोजगार और स्वरोजगार के लिए तैयार किया जा रहा है।
मिशन के आंकड़ों के मुताबिक, नामांकित 16,01,791 युवाओं में से 7,98,978 को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इनमें से 6,90,582 अभ्यर्थियों का असेसमेंट पूरा हुआ, जबकि 2,97,652 युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में नियुक्ति मिल चुकी है।
प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त रुख अपनाया जा रहा है। । गड़बड़ी पाए जाने पर 49 ट्रेनिंग पार्टनर को ब्लैकलिस्ट किया गया है, जबकि दो दर्जन से अधिक प्रशिक्षण प्रदाताओं को दो वर्ष के लिए डिबार किया गया है।
कौशल व उद्योग के बीच गैप कम करने की कोशिश
वर्तमान में 35 सेक्टर और 1300 से अधिक जाब रोल्स में युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। कृषि, आटोमोबाइल, ब्यूटी एंड वेलनेस, कैपिटल गुड्स, कंस्ट्रक्शन, घरेलू कार्य, इलेक्ट्रानिक्स, फूड प्रोसेसिंग, ग्रीन जाब्स, हैंडीक्राफ्ट-कारपेट, हेल्थ केयर, आइटी, लाजिस्टिक्स, मैनेजमेंट, मीडिया एंड एंटरटेनमेंट, प्लंबिंग, ऊर्जा और टेक्सटाइल सहित अनेक सेक्टरों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
व्यावसायिक एवं कौशल विकास मंत्री कपिल देव अग्रवाल का कहना है कि आने वाले समय में मिशन का मुख्य फोकस प्रशिक्षण से सीधे रोजगार तक मजबूत लिंक बनाने पर रहेगा, जिससे अधिक से अधिक युवाओं को स्थायी रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल सकें। कौशल और उद्योग की मांग के बीच गैप को खत्म करने की भी कोशिश की जा रही है।  |