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सेना भर्ती के नाम पर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाला पकड़ा गया, STF की लखनऊ यूनिट ने किया गिरफ्तार

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सेना भर्ती के नाम पर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाला पकड़ा गया, STF की लखनऊ यूनिट ने किया गिरफ्तार



जागरण संवाददाता, लखनऊ। सदर के उस्मान चौक से एसटीएफ की लखनऊ यूनिट ने ऐसे जालसाज को पकड़ा है जो युवाओं को सेना भर्ती का मेडिकल परीक्षण पास कराने के नाम पर ठगी करता था। उसके पास से पांच लोगों के अंकपत्र, फर्जी आधार कार्ड और अन्य सामान मिला है।

आरोपित के खिलाफ कैंट थाने में प्रतिरूपण, धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेजा गया है। आरोपित नाम बदलकर लोगों से ठगी को अंजाम देता था।

एसटीएफ के उपाधीक्षक दीपक कुमार सिंह ने बताया कि बीते कई दिनों से लखनऊ और उसके आसपास के जनपदों में सेना भर्ती के नाम पर युवाओं से ठगी की सूचना मिल रही थी। मंगलवार को उनकी टीम को एक सूचना मिली की ठगी में शामिल आरोपित एक अभ्यर्थी से दस्तावेज लेने आ रहा है।

इस पर टीम ने कैंट के सदर इलाके में उस्मान चौक के पास से उसे गिरफ्तार कर लिया। मुखबिर के बताए हुलिए के आधार पर युवक को एसटीएफ ने पकड़ा तो उसके पास से कन्नौज के गोवा सतौरा निवासी आकाश कुमार नाम का एक आधार कार्ड मिला। जांच में यह फर्जी निकला।

सख्ती से पूछताछ में युवक ने अपना नाम कन्नौज के छिबरामऊ स्थित भोगपुर निगोह निवासी आलोक तिवारी बताया।

आलोक ने बताया कि वह सेना में भर्ती के लिए केंद्रों पर आने वाले लड़अभ्यर्थियों पर निगाह रखता था। पहली बार में जिन्हे मेडिकल परीक्षण में बाहर कर दिया जाता उनके बारे में पता लगाकर टेस्ट में पास कराने के नाम पर एक से डेढ़ लाख रुपये ले लेता था।

इसके बाद आठ लड़कों की टीम बनाकर उन्हें भर्ती का झांसा देता। मेडिकल में जिन बच्चों के हाथ कांपने की समस्या होती उनको एक घंटे पहले ड्यूराबोलिन का इंजेक्शन लगवा देता जिसके असर से हाथ कांपने बंद हो जाते। जिनके कान में समस्या होती उनका कान साफ करा देता।

इसके बाद उन्हें दोबारा मेडिकल टेस्ट के लिए भेजता था। अगर कोई अभ्यर्थी स्वतः मेडिकल में पास हो जाता तो आलोक उनके रुपये खुद रख लेता था। फेल होने पर रकम से 10-20 हजार रुपये काट कर बाकी लौटा देता। डर की वजह से लड़के किसी से कोई शिकायत भी नहीं करते थे।

गारंटी के नाम पर रख लेता था अंकपत्र

जांच में सामने आया कि आलोक युवाओं का मूल अंकपत्र ले लेता था। जब तक उसे रुपये नहीं मिल जाते तब तक वह अंक पत्र लौटाता भी नहीं था। एसटीएफ अब उसके मददगारों की तलाश में जुटी है।   
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